डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर भौतिक विभाग की फिजिक्स ऑर्गेनाइजेशन द्वारा गामा किरण स्पेक्ट्रोमेट्री पर कार्यशाला का आयोजन

जालंधर (अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर भौतिक विभाग ने सरकार से प्राप्त डीबीटी (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) अनुदान के अंतर्गत छात्रों और शिक्षकों को उन्नत विकिरण संसूचन तकनीकों की गहन जानकारी प्रदान करने के लिए “गामा किरण स्पेक्ट्रोमेट्री” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एनआईटी जालंधर के भौतिक विभाग के प्रो. रोहित मेहरा थे। सत्र की शुरुआत डी.ए.वी. गान के गायन से हुई। डॉ. शिवानी (प्रभारी, भौतिकी संघ) ने मुख्य वक्ता प्रो. मेहरा, प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार, उप-प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष (भौतिक विभाग) डॉ. कुॅंवर राजीव, डीबीटी समन्वयक डॉ. शरणजीत संधू, डीन अकादमिक डॉ. नवजीत शर्मा, भौतिक विभाग के सभी संकाय सदस्यों और छात्रों का स्वागत किया। प्रो. कुॅंवर राजीव और प्राचार्य ने प्रो. मेहरा का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। तत्पश्चात, डॉ. कुॅंवर राजीव ने वक्ता का श्रोताओं से परिचय कराया। इसके बाद, प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने छात्रों को संबोधित किया और हमारे विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया। सर ने विकिरण के विषय पर भी चर्चा की, और विज्ञान में इसके प्रकारों, प्रभावों और महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. मेहरा ने अपने व्याख्यान की शुरुआत गामा किरणों, उनकी उत्पत्ति और परमाणु भौतिकी, पर्यावरण अध्ययन, पदार्थ विज्ञान और चिकित्सा इमेजिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनके महत्व के अवलोकन से की।

उन्होंने गामा किरण स्पेक्ट्रोमेट्री के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि यह रेडियोधर्मी स्रोतों से निकलने वाले गामा-किरणों की ऊर्जा और तीव्रता को कैसे मापता है। उन्होंने गामा किरण स्पेक्ट्रोमीटर की कार्यप्रणाली की व्याख्या की और इसके घटकों जैसे कि सिंटिलेशन डिटेक्टर, सेमीकंडक्टर डिटेक्टर (जैसे HPGe) और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स पर चर्चा की। प्रो. मेहरा ने सटीक परिणाम प्राप्त करने के लिए डिटेक्टर अंशांकन, ऊर्जा विभेदन और स्पेक्ट्रम विश्लेषण के महत्व पर बल दिया। व्याख्यान में गामा स्पेक्ट्रोमेट्री की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई, जिसमें पृष्ठभूमि विकिरण हस्तक्षेप और उचित परिरक्षण की आवश्यकता शामिल है। व्याख्यान के बाद, सभी छात्रों और संकाय सदस्यों ने केंद्रीय अनुसंधान सुविधा प्रयोगशाला का दौरा किया, जहाँ प्रो. मेहरा ने रेडियोधर्मी स्रोतों के उपयोग का प्रदर्शन किया, उन्हें तैयार करने की विधि बताई और मानव स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने लाइव गामा स्पेक्ट्रोमेट्री मापों के माध्यम से मिट्टी में यूरेनियम, क्लोरीन और रेडॉन जैसे तत्वों का पता लगाने और वास्तविक समय में स्पेक्ट्रा प्रदर्शित करने का भी प्रदर्शन किया। प्रोफेसर मेहरा की विशेषज्ञता, लाइव प्रदर्शन और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि ने दर्शकों को गामा किरण स्पेक्ट्रोमेट्री और इसकी वैज्ञानिक और सामाजिक प्रासंगिकता की बेहतर समझ प्रदान की।

About admin

Check Also

नवजीवन वेलफेयर सोसाइटी, जालंधर द्वारा PiMS अस्पताल जालंधर के सहयोग से सितंबर माह में चार गांवों में मुफ्त मेडिकल कैंप आयोजित किए

जालंधर (मक्कड़) :- नवजीवन वेलफेयर सोसाइटी, जालंधर द्वारा PiMS अस्पताल जालंधर के सहयोग से सितंबर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *