फगवाड़ा/अरोड़ा – मोहन लाल उप्पल डी.ए.वी. कॉलेज, फगवाड़ा में श्री अमृतसर साहिब की स्थापना की 450वीं वर्षगांठ को समर्पित एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरु नानक रिसर्च इंस्टीट्यूट, बर्मिंघम, इंग्लैंड के निदेशक डॉ. हरजिंदर सिंह दिलगीर ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ श्री अमृतसर साहिब के इतिहास और सिख धर्म में इसके विशेष स्थान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
सेमिनार के दौरान डॉ. दिलगीर ने श्री अमृतसर साहिब की स्थापना से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने इस पवित्र शहर के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सिख विरासत में इसके अहम योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्री अमृतसर साहिब सिख धर्म का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ सेवा, समानता, आपसी भाईचारे और मानवता के कल्याण की शिक्षाओं का प्रतीक भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने इतिहास और विरासत का गहराई से अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों की सही जानकारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है और अपनी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करती है।
इस अवसर पर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. किरणजीत रंधावा ने कहा कि श्री अमृतसर साहिब का इतिहास सेवा, समानता और आपसी भाईचारे जैसे उच्च आदर्शों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार विद्यार्थियों को अपने इतिहास और समृद्ध विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनके महत्व को समझने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
सेमिनार के दौरान विद्यार्थियों ने विषय में गहरी रुचि दिखाई और श्री अमृतसर साहिब के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को पंजाब के इतिहास, सिख विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को अधिक गहराई से समझने का अवसर मिला।
Jiwanjot Savera