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डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर में ‘ऑप्टिकल फाइबर तथा लेज़र (LASERs) के कुछ रोचक उपयोग” विषय पर एक एक्सटेंशन लेक्चर‘ आयोजित

जालंधर (अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर भौतिक विभाग द्वारा डी.बी.टी. स्टार महाविद्यालय योजना के अंतर्गत ‘फिजिक्स एसोसिएशन’ के तत्वावधान में ‘ऑप्टिकल फाइबर तथा लेज़र (LASERs) के कुछ रोचक उपयोग’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के इलेक्ट्रॉनिकी प्रौद्योगिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनिंदर लाल सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के नेतृत्व तथा वरिष्ठ उप-प्राचार्य एवं भौतिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुँवर राजीव के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डी.ए.वी. गान से हुआ। इसके पश्चात मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. कुँवर राजीव ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया तथा विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने और विषय की मूलभूत अवधारणाओं को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य वक्ता का अभिनंदन करते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान का विस्तार करने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकासों से निरंतर परिचित रहने का संदेश दिया।

‘फिजिक्स एसोसिएशन’ की प्रभारी डॉ. रीना देवी ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता डॉ. मनिंदर लाल सिंह ने अपने व्याख्यान में प्रकाशीय संचार के विकासक्रम की विस्तृत जानकारी दी तथा प्रकाशीय तंतु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी के महत्त्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रकाशीय तंतु संचार के मूलभूत भौतिक सिद्धांतों, इसकी प्रमुख विशेषताओं तथा ‘फाइबर ऑप्टिक लिंक अराउंड द ग्लोब’ (FLAG) के माध्यम से विश्वव्यापी संचार संपर्क स्थापित करने में इसकी भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने सजावटी प्रकाश व्यवस्था, मोटर वाहन उद्योग, परिधान एवं अभिकल्पना प्रौद्योगिकी तथा संवेदकों में प्रकाशीय तंतुओं के विविध उपयोगों की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, सैन्य क्षेत्र, मनोरंजन, शिक्षण-सहायक उपकरणों, प्रकाशीय आँकड़ा-संग्रहण तथा प्रकाशीय छलावरण जैसी तकनीकों में लेसर के महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। व्याख्यान के अंतिम चरण में उन्होंने त्रिविमीय प्रदर्शन तथा होलोग्राफी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की कार्यप्रणाली एवं संभावनाओं से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया। कार्यक्रम के दौरान भौतिक विभाग द्वारा आयोजित दो ऑनलाइन गतिविधियों के विजेताओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इनमें 16 सितंबर, 2026 को ‘विश्व ओजोन दिवस’ के अवसर पर आयोजित ‘शीर्षक लेखन प्रतियोगिता’ तथा 18 सितंबर, 2026 को ‘तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता’ सम्मिलित थीं। कार्यक्रम के अंत में शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. नवजीत शर्मा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उप-प्राचार्या प्रो. सोनिका दानिया, अनुसंधान एवं विकास अधिष्ठाता डॉ. शरणजीत संधू, भौतिक विभाग की डी.बी.टी. समन्वयक डॉ. रविंदर कौर, डॉ. प्रीति, डॉ. रितु पाल, डॉ. सुनील ठाकुर, प्रो. राहुल सेखरी, डॉ. शिवानी तथा डॉ. सुमित सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित रहे। इस व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकाशीय संचार की कार्यप्रणाली एवं महत्त्व को समझने का अवसर मिला। साथ ही, वे प्रकाशीय तंतुओं और लेसर के दैनिक जीवन में होने वाले व्यावहारिक उपयोगों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनकी बढ़ती उपयोगिता से भी परिचित हुए।

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