एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स जालंधर में NSS कैंप का दूसरा दिन स्टूडेंट्स के लिए ज्ञान से भरा रहा

जालंधर (अरोड़ा) :- एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स जालंधर में सात दिन के NSS कैंप का दूसरा दिन है, जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स को HIV और AIDS जैसे गंभीर मुद्दों के बारे में जागरूक किया गया, वहीं दूसरी तरफ भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्वर्णिम भारत की थीम की शुरुआत और महत्व को बताया गया। कैंप के दूसरे दिन, पहले टेक्निकल सेशन में, जगजीत सिंह, जो अपोलो टायर हेल्थ केयर सेंटर पहल के लुधियाना ऑफिस में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम कर रहे हैं, एक NGO संस्था जो 2026 में अपने 30 साल भी पूरे कर रही है, रिसोर्स पर्सन के तौर पर मौजूद थे। उन्हें पूरे पंजाब में HIV की रोकथाम, मरीज़ों की काउंसलिंग और कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम में कई सालों का अनुभव है। उन्होंने अस्पतालों, हेल्थ सेंटरों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर काम किया है। HIV, TB और STIs पर उनके अवेयरनेस कैंपेन ने अनगिनत लोगों की ज़िंदगी को छुआ है, खासकर युवाओं के बीच। उन्होंने स्टूडेंट्स के साथ HIV और AIDS के कारण, उनकी रोकथाम, पंजाब में AIDS के दिल दहला देने वाले आंकड़े और पंजाब में इसके कारणों के बारे में बताया। इसी तरह, दूसरे सेशन में एपीजे कॉलेज ऑफ फाइनल्स, जालंधर के हिंदी डिपार्टमेंट से डॉ. अंजना रिसोर्स पर्सन के तौर पर मौजूद थीं।

उन्होंने स्वर्णिम भारत थीम पर अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वर्णिम भारत की नींव सप्त ऋषियों के ज्ञान में है, जिनके ज्ञान, मूल्यों और दूरदर्शिता ने भारत की प्राचीन संस्कृति को आकार दिया। उनकी शिक्षाएं सिर्फ अध्यात्म तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि विज्ञान, नैतिकता और धार्मिक जीवन के क्षेत्रों में भी समाज का मार्गदर्शन करती थीं। आज भी उनका ज्ञान एक प्रगतिशील और प्रबुद्ध भारत की नींव बना हुआ है। सप्त ऋषि कौन थे? उन्होंने स्टूडेंट्स के साथ अपने विचार शेयर किए कि कैसे उन्होंने अपने ज्ञान, तपस्या और दूर की सोच से एक सुनहरे भारत के निर्माण में योगदान दिया। प्रिंसिपल डॉ. नीरजा ढींगरा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के तकनीकी युग में NSS विंग द्वारा स्टूडेंट्स को वेदों की समृद्ध विरासत से जोड़ने का जो प्रयास किया गया है, वह निस्संदेह सराहनीय है। बी.डी. पार्ट III की स्टूडेंट मुस्कान ने स्टेज ने मंच संचालक की भूमिका निभाई। इस मौके पर NSS डीन डॉ. सिम्की देव, मैडम रितु, डॉ. रमन दादरा संचित कुमार और चित्राक्ष मौजूद थे।

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