राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक एवं एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता गुरिंदरवीर सिंह ने विद्यार्थियों के सवालों के दिए जवाब; प्रेसिडेंट पूजा भाटिया ने कहा—
अपने विद्यार्थी को इतिहास रचते देखना स्कूल के लिए सबसे गर्व का क्षण
जालंधर (अरोड़ा) :- कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल (को-एड), जालंधर के गलियारों में उस समय तालियों की गूंज सुनाई दी, जब स्कूल के पूर्व विद्यार्थी और भारत के सबसे तेज धावकों में शामिल गुरिंदरवीर सिंह अपने पुराने स्कूल लौटे। कभी जिन गलियारों में वह एक विद्यार्थी के रूप में चला करते थे, आज उन्हीं गलियारों में उनकी उपलब्धियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। स्कूल की ओर से आयोजित विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुरिंदरवीर सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। गुरिंदरवीर सिंह पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में 10.09 सेकंड के समय के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं और एशियाई खेल 2026 में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इस अवसर पर उनके कोच एवं अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक सरबजीत सिंह हैप्पी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धियों की सराहना देशभर में हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनकी प्रशंसा की। क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह ने भी उनके रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन की सराहना की, जबकि फिल्म अभिनेत्री आलिया भट्ट ने उनके साथ एक भावपूर्ण बातचीत में उनकी सफलता का जश्न मनाया।

युवा पत्रकारों ने चैंपियन से पूछे दिलचस्प सवाल
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पहलू उस समय देखने को मिला, जब विद्यार्थियों ने युवा पत्रकारों की भूमिका निभाते हुए गुरिंदरवीर सिंह से सीधे सवाल पूछे। विद्यार्थियों ने उनके स्कूली मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के सफर, पदक जीतने के पीछे किए गए संघर्ष, असफलताओं, त्याग और सुबह-सुबह होने वाले कठिन अभ्यास के बारे में जानकारी हासिल की। विद्यार्थियों ने यह भी पूछा कि अपने पुराने स्कूल में दोबारा लौटकर उन्हें कैसा महसूस हो रहा है और देश के लिए खेलने का सपना देखने वाले बच्चों को वह क्या संदेश देना चाहेंगे। गुरिंदरवीर सिंह ने सभी सवालों का सहजता से जवाब देते हुए कहा कि प्रतिभा सफलता का दरवाजा खोलती है, लेकिन अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास ही व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि रिकॉर्ड केवल स्टेडियम की रोशनी में नहीं बनते, बल्कि रोजाना के कठिन अभ्यास, निरंतर मेहनत और समर्पण से तैयार होते हैं। इसके बाद विद्यार्थियों ने उनके कोच सरबजीत सिंह हैप्पी से भी बातचीत की। कोच ने उभरती खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें निखारने, नियमित अभ्यास, मानसिक मजबूती तथा अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हर चैंपियन की सफलता के पीछे निरंतर प्रशिक्षण और मजबूत इच्छाशक्ति की अहम भूमिका होती है।

अपने विद्यार्थी को इतिहास रचते देखना गर्व का क्षण : पूजा भाटिया
कार्यक्रम का भावुक क्षण तब आया, जब विद्यार्थियों ने स्कूल की माननीय प्रेसिडेंट पूजा भाटिया से पूछा कि अपने पूर्व विद्यार्थी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते देख उन्हें कैसा महसूस होता है और युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन की क्या भूमिका होती है। पूजा भाटिया ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि गुरिंदरवीर सिंह की सफलता पूरे कैम्ब्रिज परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने उनकी उपलब्धि के पीछे छिपी मेहनत, समर्पण और दृढ़ संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरिंदरवीर सिंह की सफलता हर विद्यार्थी को यह विश्वास दिलाती है कि यदि प्रतिभा को समय पर पहचाना जाए, उचित मार्गदर्शन मिले और ईमानदारी से प्रोत्साहित किया जाए, तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेलों की भूमिका शिक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। खेल बच्चों में आत्मविश्वास, धैर्य, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करते हैं। उन्होंने उभरते खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन उपलब्ध करवाने के लिए स्कूल की प्रतिबद्धता भी दोहराई। पूजा भाटिया ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरिंदरवीर सिंह को किसी दूर के सितारे के रूप में देखने के बजाय इस बात का प्रमाण मानना चाहिए कि आज किसी भी कक्षा में बैठा विद्यार्थी कल का चैंपियन बन सकता है।

विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर किया प्रोत्साहित
कार्यक्रम के दौरान गुरिंदरवीर सिंह ने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अपने हाथों से प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस सम्मान ने युवा खिलाड़ियों के चेहरों पर खुशी ला दी और उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। स्कूल प्रबंधन की ओर से गुरिंदरवीर सिंह और उनके कोच सरबजीत सिंह हैप्पी को भी सम्मान चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान कैम्ब्रिज परिवार का गौरव बढ़ाने और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक था। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि किसी भी शिक्षण संस्थान की महानता केवल कक्षाओं में दी जाने वाली शिक्षा से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र, आत्मविश्वास और साहस से भी मापी जाती है। पूरे स्कूल परिवार और विद्यार्थियों के लिए यह बेहद गर्व का क्षण रहा कि उन्होंने अपने ही पूर्व विद्यार्थी को एक चैंपियन और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में अपने बीच देखा। कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल (को-एड), जालंधर के लिए यह केवल एक पूर्व विद्यार्थी की घर वापसी नहीं थी, बल्कि इस बात की याद दिलाने वाला अवसर था कि हर राष्ट्रीय रिकॉर्ड के पीछे एक ऐसी यात्रा होती है, जिसकी शुरुआत कहीं साधारण परिस्थितियों से होती है। उचित मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ अगला रिकॉर्ड बनाने वाला खिलाड़ी भी आज स्कूल के मैदान में अभ्यास कर रहा हो सकता है। उपलब्धियों का सम्मान, सपनों को उड़ान और चैंपियनों का निर्माण—यही है कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल की प्रेरणादायक सोच।
Jiwanjot Savera