डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर द्वारा “सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक भौतिकी में अग्रणी” विषय पर दि्वतीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

जालंधर (अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर के स्नातकोत्तर भौतिक विभाग ने डीबीटी स्टार कॉलेज योजना के तत्वावधान में 11-12 सितंबर 2025 को “सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक भौतिकी में अग्रणी” विषय पर दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। यह सम्मेलन सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक भौतिकी में नवीनतम विकास पर केंद्रित था, जो अकादमिक आदान-प्रदान, सहयोग और विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों की खोज के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों से 86 प्रतिभागियों ने प्रतिभागिता की।प्रतिनिधियों ने जीएनडीयू अमृतसर, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला, आईआईटी दिल्ली, आईआईएसईआर भोपाल, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, जामिया हमदर्द, आईकेजीपीटीयू, डीएवी विश्वविद्यालय जालंधर, क्लस्टर विश्वविद्यालय श्रीनगर, जादवपुर विश्वविद्यालय और एनआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में 21 मौखिक प्रस्तुतियाँ, 19 पोस्टर प्रस्तुतियाँ और विविध विषयों पर छह विशेषज्ञ सत्र शामिल थे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत डी.ए.वी. गान और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। डॉ. सुनील ठाकुर ने सम्मेलन का परिचय दिया, जिसके बाद प्राचार्य एवं सम्मेलन निदेशक डॉ. राजेश कुमार, संयोजक डॉ. कुॅंवर राजीव ने अपने संबोधन दिए। इसके अलावा, रजिस्ट्रार प्रो. अशोक कपूर, डीबीटी समन्वयक डॉ. पुनीत पुरी और डॉ. शरणजीत संधू, डीन अकादमिक डॉ. नवजीत शर्मा भी उद्घाटन सत्र में शामिल हुए और मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश कुमार (आईआईटी रोपड़) एवं डॉ. सुनील बंसल (पंजाब विश्वविद्यालय) को पौधे भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। अपने स्वागत भाषण में, प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने सी.वी. रमन, होमी जे. भाभा, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, विक्रम साराभाई, जे.सी. बोस और एस.एन. बोस जैसे भारतीय वैज्ञानिकों के साथ-साथ आईआईएससी, इसरो, बीएआरसी, टीआईएफआर और आईआईएसईआर जैसे प्रमुख शोध संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने नवाचार, सहयोग और अनुसंधान नेटवर्किंग के महत्व पर बल दिया।डॉ. मुकेश कुमार ने अपने मुख्य भाषण में “सोलर-ब्लाइंड फोटोडिटेक्टरों के लिए पतली फिल्म और विषम संरचनाओं” पर चर्चा की और वन अग्नि का पता लगाने, उपग्रह प्रणालियों और सुरक्षित संचार में उनके अनुप्रयोगों पर ज़ोर दिया। डॉ. सुनील बंसल ने परमाणु मॉडल, प्रायोगिक उपकरणों और मानक मॉडल की अंतर्दृष्टि के साथ “कणों के चिड़ियाघर की यात्रा” का वर्णन किया। प्रो. रोहित मेहरा (एनआईटी जालंधर) ने केले के पत्तों से प्राप्त पॉलिमर का उपयोग करके भूजल से यूरेनियम निकालने पर चर्चा की। डॉ. हरप्रीत (जीएनडीयू) ने डोप्ड ऑर्गेनिक क्रिस्टल का उपयोग करके क्वांटम सेंसिंग में हुई प्रगति पर प्रस्तुति दी और एनवी-डायमंड प्रणालियों के लागत-प्रभावी विकल्पों पर प्रकाश डाला। डॉ. हितेश शर्मा (एनआईटी दिल्ली) ने क्वांटम यांत्रिकी में सैद्धांतिक विधियों में हुई प्रगति पर बात की, जबकि डॉ. विजयता दानी चड्ढा (पंजाब विश्वविद्यालय) ने “स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन में विकिरण” विषय पर व्याख्यान दिया और परमाणु चिकित्सा को निदान और चिकित्सा से जोड़ा। समापन सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य अतिथि डॉ. हितेश शर्मा ने की। डॉ. रितु पाल ने मुख्य बिंदुओं का सारांश प्रस्तुत किया, जिसके बाद डॉ. शरणजीत संधू ने एक विस्तृत सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की। सर्वश्रेष्ठ मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अपने समापन भाषण में, प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने प्रतिभागियों को नवाचार और अनुसंधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. नवजीत शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन और उसके बाद राष्ट्रगीत के साथ हुआ। सम्मेलन ने अंतःविषय संवाद को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया, अग्रणी अनुसंधान को प्रदर्शित किया और सहयोग को बढ़ावा दिया, जिससे प्रतिभागियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित संकाय सदस्य उपस्थित थे, जिनमें उप-प्राचार्या प्रो. सोनिका दानिया, डॉ. पी.के. शर्मा, प्रो. शरद् मनोचा, प्रो. पंकज गुप्ता, प्रो. मनीष खन्ना, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. आशु बहल, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. तनु महाजन, डॉ. शिवानी वर्मा, डॉ. मनप्रीत कौर, डॉ. पूजा, डॉ. ईशा बहल, डॉ. सोनिका आरती, डॉ. शिल्पा सेतिया, डॉ. अमनदीप कौर, प्रो. रंजीता, प्रो. जसमीन कौर, प्रो. साहिल नागपाल, डॉ. रविंदर कौर, डॉ. रीना देवी, डॉ. प्रीति, प्रो. राहुल और डॉ. शिखर शामिल थे।

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