डीएवी यूनिवर्सिटी और एल एंड टी ने भारत का पहला बीटेक मेक्ट्रोनिक्स प्रोग्राम किया लॉन्च

जालंधर (अरोड़ा) :- डीएवी यूनिवर्सिटी ने लार्सन एंड टुब्रो की सहायक कंपनी एलएंडटी एडुटेक के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इंजीनियरिंग पर केंद्रित बीटेक मेक्ट्रोनिक्स प्रोग्राम पेश लॉंच किया है। भारत में अपनी तरह का यह पहला प्रोग्राम है, जिसमें एल एंड टी के विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाए जाने वाले कोर्स शामिल होंगे और यह प्रोग्राम इसी सत्र से शुरू होने वाला है। लार्सन एंड टुब्रो में कॉलेज कनेक्ट बिजनेस की प्रमुख फेबिन एम एफ और डीएवी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. मनोज कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एलएंडटी एडुटेक यूनिवर्सिटी में ई-मोबिलिटी और ईवी के लिए एक अत्याधुनिक सैंटर ऑफ एक्सलेन्स भी स्थापित करेगी। डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि इंडस्ट्री-कोलेबोरेटेड कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटोमोबाइल उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव के साथ बी-टेक ग्रेजुएटस के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। पाठ्यक्रम को एल एंड टी एडुटेक से इनपुट के साथ विकसित किया गया है। छात्र प्रत्येक पाठ्यक्रम में प्रोजेक्ट पूरा करेंगे और एल एंड टी के साथ छह महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। श्रीमति फेबिन ने तेजी से बढ़ते ईवी उद्योग के लिए कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होने कहा सरकार ने 2030 तक कमर्शियल और निजी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का लक्ष्य दिया है और इंडस्ट्री को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इंजीनियरों कि मांग होगी। उन्होंने उद्योग-अकादमिक साझेदारी को विकसित करने के लिए एलएंडटी की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि उद्योग और शिक्षाविदों को बदलती मांग के साथ विकसित होना चाहिए और बीटेक मेक्ट्रोनिक्स इस दिशा में एक पहल है। एल एंड टी में संस्थागत बिक्री क्षेत्रीय प्रमुख आशीष मिश्रा ने उल्लेख किया कि कंपनी की 18 सहायक कंपनियां सालाना 34000 नए स्नातकों की भर्ती करती हैं और ईवी उद्योग को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार कुशल इंजीनियरों की आवश्यकता है। एलएंडटी देश में जनशक्ति की तीसरी सबसे बड़ी भर्तीकर्ता है। उन्होंने कहा कि ईवी उद्योग को उन प्रशिक्षित इंजीनियरों की आवश्यकता है जो जल्दी से सीख लें और नेतृत्व करें। इस कार्यक्रम में एल एंड टी, चंडीगढ़ के शाखा प्रबंधक जसवंत सिंह, विभिन्न विभागों के डीन और फ़ैकल्टी मेम्बर उपस्थित थे। सीबीएमई और मानविकी विभाग की डीन डॉ. गीतिका नागराथ ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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