जालंधर (अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर जूलॉजी विभाग द्वारा डार्विन जूलॉजिकल सोसाइटी के तत्वावधान में स्टेम कोशिकाओं के उपयोग एवं चिकित्सकीय महत्त्व पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ की अतिरिक्त आचार्य डॉ. अरुणा रखा ने ‘प्रयोगशाला से रोगियों तक’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढंग से बताया कि स्टेम कोशिकाएँ किस प्रकार विभिन्न रोगों के उपचार में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। साथ ही, उन्होंने जीन चिकित्सा और स्टेम कोशिका चिकित्सा के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया।




डॉ. अरुणा रखा ने अपने व्याख्यान का आरंभ विषय की मूलभूत अवधारणाओं से करते हुए क्रमशः स्टेम कोशिका अनुसंधान एवं चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास और उपलब्धियों की जानकारी प्रदान की। इस व्याख्यान में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके पश्चात आयोजित विचार-मंथन सत्र में विद्यार्थियों ने भारत में स्टेम कोशिका चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर प्रोफेसर पंकज गुप्ता, डॉ. रेणुका मल्होत्रा, प्रोफेसर पूजा शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. ऋषि कुमार, डॉ. अभिनय ठाकुर तथा डॉ. पंकज बग्गा उपस्थित रहे।



विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उप-प्राचार्य डॉ. कुँवर राजीव ने उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपनी मानसिक क्षमता को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, एकाग्रता और दृढ़ संकल्प ही जीवन में सफलता प्राप्त करने तथा शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को साकार करने के प्रमुख आधार हैं।
कार्यक्रम के अंत में डार्विन प्राणी विज्ञान सभा के अध्यक्ष डॉ. दीपक वधावन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
Jiwanjot Savera