अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस पर डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर में कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित

जालंधर (अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के स्नातकोत्तर अंग्रेज़ी विभाग के अंतर्गत ‘अंग्रेज़ी संगोष्ठी’ द्वारा 30 सितंबर, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस के अवसर पर कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्राध्यापकों एवं सहपाठियों के समक्ष अंग्रेज़ी, हिन्दी तथा पंजाबी भाषाओं में कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के उप-प्राचार्य प्रो. कुँवर राजीव ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर पाठ्येतर गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अपने विद्यार्थी जीवन को स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि एक शिक्षक द्वारा प्रदान किए गए अवसर ने उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने का आत्मविश्वास दिया, जो आज भी उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। उप-प्राचार्या एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सोनिका दानिया ने हमारे जीवन में कविता की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘जहाँ मन भय से मुक्त हो’ तथा अमृता प्रीतम की प्रसिद्ध कविता ‘अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कविता जहाँ मानव की महानतम आशाओं को अभिव्यक्ति दे सकती है, वहीं उसके गहरे घावों और पीड़ा को भी स्वर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि ठाकुर एक ऐसे देश की कल्पना करते हैं जहाँ मन भय से मुक्त हो और तर्क की स्पष्ट धारा में जागृत हो, जबकि अमृता प्रीतम विभाजन की त्रासदी और पीड़ा को व्यक्त करने के लिए अठारहवीं शताब्दी के सूफी कवि वारिस शाह को उनकी समाधि से पुकारती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों कविताएँ अपनी मूल भाषाओं की सीमाओं से परे जाकर सार्वभौमिक भावनाओं की अभिव्यक्ति बन चुकी हैं।

अनुवाद दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि अनूदित कविताएँ अंततः हमारी सांझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन जाती हैं। ‘अंग्रेज़ी संगोष्ठी’ की प्रभारी प्रो. सुरुचि काटला ने अतिथियों, निर्णायकों एवं प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने वर्तमान समय में कविता के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में असंख्य शब्द—सूचनाएँ, शीर्षक, परिचय-वाक्य और संदेश—हमारे सामने आते हैं, जिनमें से अधिकांश कुछ ही समय बाद विस्मृत हो जाते हैं। इसके विपरीत, सदियों पहले किसी कवि द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियाँ आज भी लोगों की स्मृति में जीवित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कविता लिखने तथा ऐसी रचना करने के लिए बधाई दी, जो समय की सीमाओं से परे स्थायी बनी रहती है। कविता पाठ प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में पंजाबी विभाग की डॉ. किरणदीप कौर, अंग्रेज़ी विभाग के डॉ. वरुण देव वशिष्ठ तथा हिन्दी विभाग की डॉ. ऋचा नांगला शामिल थीं। प्रतियोगिता में मुस्कान यादव (बी.ए. तृतीय वर्ष) ने प्रथम, तरनप्रीत कौर (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने द्वितीय तथा तन्वी (बी.बी.ए. प्रथम वर्ष) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भवनीत सिंह (बी.ए. तृतीय वर्ष) को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का समापन तुषार चड्ढा तथा दिविषी वर्मा की विशेष प्रस्तुतियों के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन दिविषी वर्मा एवं अनाहिद प्रताप कौर ने किया, जबकि तुषार चड्ढा ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अंग्रेज़ी विभाग के प्रो. शरद मनोचा, प्रो. नरेश कुमार, डॉ. प्रदीप कौर राजपाल तथा प्रो. गुरजीत सिंह सहित विभाग के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. सीमा, प्रो. मोनिका बहल, डॉ. दीपाली हांडा, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. राजवंत कौर, डॉ. मीनाक्षी मोहन, डॉ. एकजोत कौर, प्रो. ईशा, प्रो. रितिका सोबती, प्रो. श्वेता, डॉ. बलवेंद्र सिंह तथा डॉ. साहिब सिंह ने भी सहभागिता की।

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