सांकेतिक भाषा को मिलेगी नई पहचान
जालंधर (अरोड़ा) :- शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मकसूदां ने मूक-बधिर एवं वाणी बाधित व्यक्तियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित संकेत पहचान प्रणाली विकसित की है। यह आधुनिक प्रणाली हाथों के संकेतों को रियल टाइम में पहचानकर उन्हें तुरंत लिखित शब्दों और आवाज़ में परिवर्तित करती है, जिससे संवाद आसान और प्रभावी बन जाता है। यह प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विज़न तकनीकों पर आधारित है। इसमें टेंसरफ्लो, ओपनसीवी, मीडियापाइप, रैंडम फॉरेस्ट, नम्पाई, पिलो, पांडा, जॉबलिब, पाई कैमरा-2 तथा सॉकेट प्रोग्रामिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है।

कैमरे से प्राप्त लाइव वीडियो के माध्यम से हाथों की गतिविधियों का विश्लेषण कर प्रशिक्षित मॉडल कुछ ही क्षणों में संबंधित पाठ और आवाज़ तैयार कर देता है। इस प्रणाली में टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा भी शामिल है, जो संकेतों को तुरंत आवाज़ में बदल देती है। यह तकनीक अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, ग्राहक सेवा केंद्रों, सार्वजनिक स्थानों और घरों में मूक-बधिर एवं वाणी बाधित व्यक्तियों के साथ संवाद को अधिक सरल बनाएगी। भविष्य में इसे सहायक उपकरणों और स्मार्ट प्रणालियों के साथ भी जोड़ा जा सकेगा। सीटी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, मकसूदां कैंपस के डॉयरेक्टर डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऐसे शोध कार्यों के लिए निरंतर प्रोत्साहित करता है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नवाचारपूर्ण परियोजनाएं तकनीकी दक्षता के साथ-साथ समावेशी समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Jiwanjot Savera