जालंधर (अरोड़ा) :- प्रिंसिपल डॉ. एकता खोसला के कुशल दिशा-निर्देशन में रीडर्स क्लब की ओर से स्वामी दयानंद लाइब्रेरी के सहयोग से प्रसिद्ध लेखक और स्पीकर डॉ. अनिरुद्ध कपूर, जो ‘द सोल स्पार्क्स-रिफ्लेक्शंस ऑफ़ एन इंट्यूटिव माइंड’ के लेखक हैं, के साथ एक दिलचस्प इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया गया। प्रिंसिपल डॉ. एकता खोसला ने इस प्रयास की प्रशंसा की और छात्राओं को लेखकों, विचारकों और जाने-माने लोगों से बातचीत करने के मौके देने की अहमियत पर ज़ोर दिया। डॉ. खोसला ने कहा कि इस तरह की बातचीत पढऩे के कल्चर को बढ़ावा देती है, स्टूडेंट्स के सोचने का नज़रिया बढ़ाती है और क्लासरूम के बाहर उनकी लर्निंग को बेहतर बनाती है। डीन रिसर्च डॉ. रमनीता सैनी शारदा ने इस सेशन का आयोजन और संचालन किया, जिसका उद्देश्य स्टूडेंट्स को एक जाने-माने लेखक के अनुभवों और नज़रिए से सीखने के लिए बढ़ावा देना था। प्रोग्राम की शुरुआत पीजी अंग्रेजी विभागाध्यक्षा डॉ. ममता के स्वागत से हुई, जिन्होंने विभाग और रीडर्स क्लब की ओर से डॉ. कपूर का स्वागत किया। इसके बाद डॉ. रमनीता सैनी शारदा ने बातचीत के उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी।

डॉ. कपूर ने अपने संबोधन में जि़ंदगी के अलग-अलग पहलुओं, सीखने, पर्सनल ग्रोथ, गाइडेंस और मेंटरशिप की अहमियत पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके दिलचस्प तरीके ने सेशन को एक आम लेक्चर के बजाय एक खुली बातचीत में बदल दिया। स्टूडेंट्स ने बातचीत में उत्साहपूर्वक भाग लिया, सवाल पूछे और अपने विचार सांझा किए, जिससे सेशन रोचक और दिलचस्प बन गया। डॉ. कपूर की किताब ‘द सोल स्पार्क्स-रिफ्लेक्शंस ऑफ़ एन इंट्यूटिव माइंड’ इस सेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। उन्होंने अपनी किताब की एक कापी कालेज लाइब्रेरी को भेंट की। उन्होंने कहा कि यह किताब छात्राओं और रीडर्स को सेशन के बाद भी उनके आइडिया और सोच को जानने का मौका देगी। बातचीत को रीडर्स क्लब की सेक्रेटरी एंजेल वालिया ने किया, जिन्होंने गेस्ट और स्टूडेंट्स के बीच बातचीत को कुशलतापूर्वक संचालित किया। सेशन एक प्रेरणादायक नोट पर खत्म हुआ, जिसमें पार्टिसिपेंट्स को पढऩे, सीखने और पर्सनल डेवलपमेंट पर कीमती बातें सीखने को मिलीं। यह प्रोग्राम साहित्य, अनुभव और उत्सुकता का एक संयोग रहा जिसने यह याद दिलाया कि कुछ अर्थपूर्ण बातें एक पन्ने से शुरू होती हैं पर किताब खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक जारी रहती हैं।
Jiwanjot Savera