बी.बी.के. डी.ए.वी. कॉलेज फॉर विमेन ने रचनात्मक वस्त्र शिल्प प्रतियोगिता के साथ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया

अमृतसर (प्रदीप) :- बी.बी.के. डी.ए.वी. कॉलेज फॉर विमेन, अमृतसर के डिज़ाइन विभाग द्वारा संस्थान की इनोवेशन काउंसिल (आई.आई.सी.) के तत्वावधान में “टेक्सटाइल क्राफ्ट इनोवेशन” विषय पर रचनात्मक प्रतियोगिता का आयोजन कर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। इस गतिविधि ने छात्राओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भारत की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प विरासत से जुड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इसने टिकाऊ फैशन, सांस्कृतिक संरक्षण तथा पारंपरिक हथकरघा प्रथाओं को समर्थन देने के महत्व के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न की। छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने समकालीन एवं नवोन्मेषी वस्त्र डिज़ाइन की खोज के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उनकी बढ़ती रुचि को प्रतिबिंबित किया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता एवं शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया। प्रस्तुत प्रविष्टियों में कढ़ाई के फ्रेम, अभिनव हस्तनिर्मित आभूषण, वॉल हैंगिंग, हाथ से पेंट किए गए स्टोल, टोट बैग, कुशन कवर तथा अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएँ शामिल थीं। प्रविष्टियों का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. सीमा जेटली, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, डॉ. रश्मि कालिया, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग तथा कामायनी आनंद, डीन, अकादमिक्स सम्मिलित थीं। हस्तनिर्मित कृतियों को एक अभिनव प्रदर्शन के माध्यम से भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें छात्राओं के कलात्मक कौशल, कल्पनाशीलता तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की समझ को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए, प्राचार्या डॉ. पुष्पिंदर वालिया ने छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता तथा डिज़ाइन विभाग के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा केवल इसकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा नहीं है, बल्कि रचनात्मकता, कौशल और टिकाऊ शिल्पकला की एक जीवंत विरासत है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ छात्राओं को इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ इसे समकालीन एवं नवोन्मेषी अभिव्यक्ति प्रदान करने का अवसर देती हैं। उन्होंने छात्राओं को पारंपरिक शिल्प एवं टिकाऊ डिज़ाइन की संभावनाओं का निरंतर अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्वदेशी ज्ञान एवं शिल्प कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में उनके प्रयासों की सराहना की। प्राचार्या डॉ. वालिया ने विजेताओं को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। समारोह में स्थिरता के एक सशक्त आयाम को जोड़ते हुए, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने टिकाऊ जूट बैग तैयार करके सक्रिय रूप से भाग लिया। उनके योगदान ने प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने तथा पुनः उपयोग, स्थिरता और जिम्मेदार उपभोग के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. ललित गोपाल, प्रमुख, डिज़ाइन विभाग तथा चीना गुप्ता, डिज़ाइन विभाग, सहित विभाग के अन्य संकाय सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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