गुरु नानक देव विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, पंजाब के संयुक्त तत्वावधान में ‘मौन की गूंज’ पर राष्ट्रीय पुस्तक-चर्चा एवं विचार-गोष्ठी ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ संपन्न

जालंधर (अरोड़ा) :- गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, पंजाब के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ कथाकार डॉ. वीणा विज ‘उदित’ के कहानी-संग्रह ‘मौन की गूंज’ पर पुस्तक-चर्चा तथा ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषय पर विचार-गोष्ठी गुरु ग्रंथ साहिब भवन स्थित कॉन्फ़्रेंस हॉल में संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ शब्द गायन एवं परिषद गीत से हुआ, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत कर रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर प्रो. सुनील कुमार के पुन: विभागाध्यक्ष पदभार ग्रहण करने पर परिषद् द्वारा उनका अभिनंदन किया गया। विद्वानों ने कहानी-संग्रह पर अपने पत्र एवं विचार प्रस्तुत किए: कवि रमन शर्मा ने कहा कि ये कहानियाँ समाज की विसंगतियों, टूटते संबंधों और मौन की संवेदनाओं का सशक्त चित्रण करते हुए पाठकों को आत्ममंथन की प्रेरणा देती हैं। डॉ. शैली जग्गी ने अपने शोधपत्र में कहा कि इस कहानी-संग्रह में स्त्री-विमर्श, पारिवारिक मूल्यों तथा मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत संतुलित एवं प्रभावी चित्रण हुआ है। उन्होंने कहा कि लेखिका की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और संप्रेषणीय है, जो पाठकों के मन को सीधे स्पर्श करती है। शोधार्थी मो. बिलाल ने इसे समकालीन कहानी की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए अंतर्मन से संवाद और यथार्थपरक चित्रण पर बल दिया। डॉ. संजय चौहान ने कथा-संसार को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मकता से अनुप्राणित बताया। शोध-छात्रा सुश्री शशि कुमारी ने कहा कि यह संग्रह हाशिए के लोगों के मौन प्रतिरोध को स्वर देकर समाधान की दिशा सुझाता है। डॉ. सीमा जैन ने कहा कि ये कहानियाँ पाठकों में संवेदनशीलता और आत्मविश्लेषण का भाव जगाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करती हैं। डॉ. अजय शर्मा ने इसे सामान्य अनुभवों को सार्वकालिक अर्थवत्ता प्रदान करने वाली उल्लेखनीय उपलब्धि कहा। प्रो. अमर सिंह ने संग्रह को करुणा, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की भारतीय परंपरा को समृद्ध करने वाला बताया। लेखकीय वक्तव्य में डॉ. वीणा विज ‘उदित’ ने कहा कि उनकी कहानियाँ वास्तविक अनुभवों से उपजी हैं और साहित्य का उद्देश्य मनुष्य के अंतर्मन को जागृत करना है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि आत्मबोध ही विश्वबोध का प्रथम सोपान है। आज के यांत्रिक समय में साहित्य का दायित्व करुणा और विश्वबंधुत्व की भावना जगाना है। उन्होंने पंजाब के साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। मंच का कुशल संचालन शोधार्थी श्री मुकेश कुमार ने किया। प्रो. विनोद कुमार ने कृति के शिल्प पक्ष पर चर्चा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में परिषद् द्वारा डॉ. वीणा विज को सम्मानित किया गया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में, डॉ सपना शर्मा, प्रो पिंकी शर्मा, डॉ नेहा,डॉ. अतुला भास्कर, कवि उपेन्द्र यादव सहित शिक्षक, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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