सीटी ग्रुप परिसर में पीटीसी पंजाबी ने करवाया ‘बैसाखी इन्फिनिया 2026’ का भव्य आयोजन

संगीत, संस्कृति और उत्सव की अनूठी शाम में एकजुट हुआ पंजाब का उत्साह

जालंधर (अरोड़ा) :- सीटी ग्रुप परिसर में आयोजित ‘बैसाखी इन्फिनिया 2026’ ने एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लिया, जब पीटीसी पंजाबी ने हजारों छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य अतिथियों के साथ मिलकर इस भव्य आयोजन को जीवंत बना दिया। सीटी ग्रुप के लिए यह गर्व और सम्मान का विषय रहा कि उसने इस शानदार कार्यक्रम की मेजबानी की और पंजाब की समृद्ध संस्कृति तथा बैसाखी की परंपरा को मंच प्रदान किया। आज के तेज़ी से बदलते दौर में, ऐसे सांस्कृतिक आयोजन अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करते हैं। ये न केवल हमारी पहचान को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट रखने वाले मूल्यों को भी पुनर्जीवित करते हैं। पीटीसी पंजाबी ने इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर यह सिद्ध किया कि वह पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे नई ऊर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। ये छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, उनमें सांस्कृतिक गर्व का भाव जगाते हैं और उन्हें जीवनभर के लिए मूल्यवान अनुभव प्रदान करते हैं। इस अवसर पर पीटीसी एंटरटेनमेंट के नेतृत्व ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सीईओ राजी एम. शिंदे, ग्लोबल चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनुभव नाथ, वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स) लाकुश सोनी तथा डिप्टी जनरल मैनेजर अनिल कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा कलाकारों का शानदार प्रदर्शन। नीरू बाजवा, मास्टर सलीम, करमजीत अनमोल, पम्मी बाई, आलाप सिकंदर, मानसी सिसोदिया, आदि, मैंडी संधू, सैंडी संधू, मयंक भारद्वाज और गुरमन मान ने अपने दमदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सीटी ग्रुप ने इस भव्य आयोजन के लिए पीटीसी पंजाबी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

ऐसे प्रयासों के माध्यम से पंजाब की संस्कृति न केवल राज्य में बल्कि विश्वभर में अपनी पहचान बना रही है। इस अवसर पर सीटी ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रो. डॉ. मनबीर सिंह, वाइस चेयरमैन हरप्रीत सिंह, को-वाइस चेयरपर्सन एडवोकेट मंजिंदर कौर तथा कैंपस डायरेक्टर डॉ जयाशीष सेठी और डॉ शिव कुमार उपस्थित रहे और उन्होंने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। सीटी ग्रुप का मानना है कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति, रचनात्मकता और अनुभवों के माध्यम से ही व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास संभव है।

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