जालंधर (मोहित अरोड़ा) :- संस्कृति केएमवी स्कूल, जालंधर में युवा प्रतिभावान छात्रों, ने कला, नृत्य, और भक्ति सांस्कृतिक विरासत के शानदार मनमोहक प्रदर्शनों और गतिविधियों के साथ जन्माष्टमी मनाई गई। यह कार्यक्रम परंपरा और रचनात्मकता का एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला मिश्रण था, भगवान कृष्ण के आनंदमयी स्वरुप को मनमोहक पोषकों में नन्हे-मुन्नों ने इसे जीवंत कर दिया। उत्सव की शुरुआत छोटे बच्चों की नृत्य प्रस्तुती से हुई, दिव्य नृत्य का प्रदर्शन इतनी शालीनता और शिष्टता के साथ किया गया कि ऐसा लगा मानो मंच पर वृन्दावन जीवंत हो उठा। नन्हे बाल गोपालों के अभिव्यंजक चेहरों एवं नृत्य ने दर्शकों को भक्ति और आनंद से मोहित कर दिया। उत्सव के उत्साह को बढ़ाते हुए, बच्चे ने कलात्मक और शिल्प गतिविधियों में बांँसुरी और मटकेों को सुसज्जित किया। जीवंतता से सजी ये कलात्मक रचनाओं के रंग और जटिल डिज़ाइन, हमारे युवाओं कलाकारों की असीम रचनात्मकता और उत्साह को दर्शाते हैं। रचना मोंगा (प्रिंसिपल) ने अपने सम्बोधन में जन्माष्टमी के महत्व परअपने हार्दिक विचार व्यक्त किये। उन्होंने प्रभु की कालजयी बुद्धि को वाक्पटुता से व्यक्त किया भगवद गीता में निहित कृष्ण सभी के लिए मार्गदर्शन के प्रतीक बने हुए हैं। छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए, हमारे दैनिक जीवन में इन मूल्यों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया गया। सत्य, करुणा और धार्मिकता के उन गुणों को अपनाएँ जिनका प्रतीक भगवान कृष्ण थे। संस्कृति केएमवी स्कूल में जन्माष्टमी उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि कला, संस्कृति और भक्ति का मिश्रण, जिससे उपस्थित सभी लोग श्रद्धा और प्रशंसा से भाव-विभोर हो उठे।
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