डीएवी कॉलेज में विश्व एड्स दिवस पर किया गया लेक्चर का आयोजन






जालन्धर (JJS):- डीऐवी कॉलेज, जालंधर के एनएसएस यूनिट एवम रेड रिबन क्लब द्वारा विश्व एड्स दिवस पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को एड्स के प्रति जागरूक करना, सावधानियां एवम इनके प्रति विद्यार्थियों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारियां बताना था। इस सेमिनार में कॉलेज 120 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कॉलेज के प्रिंसिपल डा. एस. के. अरोड़ा ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अध्यापकों एवम विदयार्थियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट करके प्रिंसिपल डा. एस. के. अरोड़ा का स्वागत किया गया। प्रो. ऋषि कुमार ने इस लेक्चर में मुख्य वक्ता रहे।

प्रिंसिपल डा. एस. के. अरोड़ा ने एड्स की बीमारियों को लेकर फैली भ्रांतियों के बारे में चर्चा की एवम युवाओं को उनकी जिम्मेवारियों के प्रति जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एड्स के कारण आज विश्व में कई मौतें हो रही हैं। एड्स जैसी भयंकर बीमारी के प्रति अज्ञानता ने कई बच्चों को अनाथ बना दिया है। एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं और समाज में इसके बारे में अज्ञानता होने के कारण इसका पता भी नहीं चलता, जिसके कारण यह भयंकर रूप ले लेती है और जानलेवा बन जाती है। विश्व एड्स दिवस लोगों को एड्स के प्रति जानकारी देने के लिए ही मनाना शुरू किया गया है। ताकि लोग इसके प्रति जागरूक हो सके। उन्होंने बताया कि 1988 से विश्व एड्स दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी।

प्रो. ऋषि कुमार ने विद्यार्थियों को एड्स के बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एड्स का पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम।' न्यूयॉर्क में 1981 में इसके बारे में पहली बार पता चला।

एड्स यानि

- ए यानी एक्वायर्ड यानी यह रोग किसी दूसरे व्यक्ति से लगता है।

- आईडी यानी इम्यूनो डिफिशिएंसी यानी यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त कर देता है।

- एस यानी सिण्ड्रोम यानी यह बीमारी कई तरह के लक्षणों से पहचानी जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कैसे एड्स धीरे धीरे मानव शरीर को संक्रमित करता है और उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता को खत्म कर देता है। जबकि अभी तक इस रोग का इलाज नहीं मिल पाया है। इसीलिए इसे सबसे भयंकर रोग भी माना जाता है। उन्होंने बताया कि 2017 तक, दुनिया भर में 28.9 मिलियन में से 41.5 मिलियन लोगों की मौत के लिए एड्स जिम्मेदार है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। उन्होंने इससे बचने के उपाय के बारे भी विद्यार्थियों को जानकारी दी। 

एनएसएस के इंचार्ज प्रो. एस. के. मिड्डा ने विद्यार्थियों को एड्स के इतिहास, इसकी शुरुआत एवम इससे होने वाली समस्याओं से अवगत कराया। उन्होनें विद्यार्थियों की सामाजिक जिम्मेदारियों को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बानी से मिलाते हुए कहा कि की श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में कहा गया है कि शरीर एक भगवान के मंदिर के समान है और हमारी आत्मा भगवान को रूप, जिसे हमें स्वच्छ एवम निर्मल रखना चाहिए। इसी तरह अगर हम कोई गलत कार्य नहीं करेंगे तो इस बीमारी से बच सकते हैं। एड्स के प्रसार से लड़ने का एकमात्र तरीका है, और वो है लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना। एचआईवी के स्थानांतरण का कारण है लापरवाही या नजरअंदाज करना। जिस वजह से यह बुरी स्थिति को और भी बदतर बना देता है। इसलिए, यह जरूरी है कि लोगों को पता चले कि एड्स क्या है, यह कैसे फैलता है और संक्रमण को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है।  अंत में डा. कोमल अरोड़ा ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। इस दौरान प्रोग्राम अफसर डा. कोमल अरोड़ा, प्रो. निधि अग्रवाल, डा. साहिब सिंह, प्रो. परमजीत कौर एवम प्रो. मोनिका अरोड़ा एवम विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

 

  • About Us

    Religious and Educational Newspaper of Jalandhar which is owned by Sarv Sanjha Ruhani Mission (Regd.) Jalandhar

  • Social With Us