प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने मेधावी विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्तियों की घोषणा की
जालंधर (अरोड़ा) :- डीएवी कॉलेज, जालंधर में डीएवी आंदोलन का 141वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह, गर्व और समर्पण के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने डीएवी आंदोलन के महान् संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संस्था की मूल शिक्षाओं और आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि डीएवी आंदोलन की शुरूआत वर्ष 1886 ई. में स्वामी दयानंद सरस्वती के दूरदर्शी विचारों को साकार करने के उद्देश्य से हुई थी। स्वामी दयानंद सरस्वती एक महान् शिक्षाविद् , समाज सुधारक और बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनका मानना था कि अज्ञानता से मुक्ति और ज्ञान की प्राप्ति ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। “अज्ञान का नाश और ज्ञान का प्रसार” का उनका संदेश ही डीएवी आंदोलन की आधारशिला बना। डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि वैदिक मूल्यों एवं आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के समन्वय के उद्देश्य से शुरू हुआ यह आंदोलन आज देश का सबसे बड़ा ग़ैर-सरकारी शैक्षिक संगठन बन चुका है।



वर्तमान में डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी (डीएवीसीएमसी), नई दिल्ली के अंतर्गत देश-विदेश में 1100 से अधिक शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। यह किसी भी ग़ैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों का विश्व में सबसे बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने कहा कि डीएवी कॉलेज, जालंधर इस प्रतिष्ठित संगठन के सबसे पुराने और गौरवशाली संस्थानों में से एक है तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि डीएवीसीएमसी, नई दिल्ली के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायक नेतृत्व में कॉलेज सामाजिक समानता, महिला सशक्तीकरण और चरित्र-निर्माण के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर डॉ. अनूप कुमार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि डीएवी कॉलेज, जालंधर क्षेत्र के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी योग्य एवं मेधावी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा केवल आर्थिक अभाव के कारण बाधित नहीं होने दी जाएगी। इसी संकल्प को और मज़बूत करते हुए उन्होंने विशेष छात्रवृत्ति-योजना की शुरूआत से संबंधित घोषणा की। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को दूर कर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक सपनों को पूरा करने में सहायता प्रदान करना है।
Jiwanjot Savera