पिम्स अस्पताल, जालंधर ने विश्व पार्किंसन दिवस पर जागरूकता और समय पर उपचार पर दिया जोर

जालंधर (मक्कड़) :- विश्व पार्किंसन दिवस के अवसर पर पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स), जालंधर ने पार्किंसन रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया। यह एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो विश्वभर में लाखों लोगों के मूवमेंट और समन्वय को प्रभावित करता है। इस अवसर पर अस्पताल द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य लोगों को समय पर निदान, उपलब्ध उपचार विकल्पों तथा इस रोग से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के महत्व के बारे में जागरूक करना था। इस अवसर पर बोलते हुए पिम्स जालंधर की कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुरभि महाजन ने बताया कि पार्किंसन रोग मस्तिष्क में डोपामिन उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के धीरे-धीरे नष्ट होने के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों में कंपकंपी (ट्रेमर्स), जकड़न, गति में कमी तथा संतुलन बनाने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मोटर लक्षणों के अलावा मरीजों को नींद में बाधा, अवसाद और संज्ञानात्मक बदलाव जैसी गैर-मोटर समस्याएं भी हो सकती हैं। डॉ. सुरभि ने आगे बताया कि भारत में पार्किंसन रोगियों की संख्या विश्व में सबसे अधिक में से एक है, जहां इसकी प्रचलन दर लगभग 15 से 43 प्रति 100,000 जनसंख्या के बीच है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक वैश्विक स्तर पर पार्किंसन रोग के मामलों में लगभग 168% की वृद्धि हो सकती है। औसतन, एक न्यूरोलॉजिस्ट हर 50 मरीजों में से लगभग 5–7 पार्किंसन के मरीजों को देखता है। लगभग 40–45% मरीजों में 22 से 49 वर्ष की आयु के बीच शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर चिकित्सकीय परामर्श से रोग के परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि लक्षणों की प्रारंभिक पहचान रोग प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित फॉलो-अप, निर्धारित उपचार का पालन तथा न्यूरोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और सपोर्ट ग्रुप्स को शामिल करते हुए बहु-विषयक दृष्टिकोण बेहतर देखभाल के लिए आवश्यक है। पिम्स जालंधर पार्किंसन रोगियों के लिए उन्नत न्यूरोलॉजिकल सेवाएं प्रदान करता है, जिसमें व्यापक जांच, दवा प्रबंधन और काउंसलिंग शामिल है। अस्पताल न्यूरोलॉजिकल विकारों से जूझ रहे लोगों के समर्थन और जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस विश्व पार्किंसन दिवस पर पिम्स ने समुदाय से अपील की है कि वे एकजुट होकर मिथकों को तोड़ें, मरीजों का समर्थन करें और एक अधिक समावेशी एवं जागरूक समाज के निर्माण में योगदान दें।

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