जालंधर (अरोड़ा) :- हंस राज महिला महाविद्यालय में स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्मोत्सव पूर्ण हर्षोल्लास से प्राचार्या डॉ. एकता खोसला जी के कुशल दिशा-निर्देशन में मनाया गया। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी क्रांति या परिवर्तन एक ही दिन में नहीं हो जाता, उसके पीछे मेहनत और लग्न होती है जिमसें ज्ञान, संस्कार और अनुभव का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का रिश्ता केवल शिक्षक और विद्यार्थी का नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और साधक का होता है। जिस प्रकार स्वामी श्रद्धानंद ने दयानंद जी को अपना गुरू बनाया और समाज परिवर्तन की दिशा में अनेकों सुधार कार्य किए इसलिए आर्य सिद्धांतों को स्मरण रखते हुए सदा वेद मार्ग को अपनाएं और न केवल अपनी उन्नति वरन् सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति समझें। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं को संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ. मीनू तलवाड़ ने गुरु-शिष्य परम्परा पर विचार सांझा करते हुए गुरु का जीवन में महत्व एवं शिष्य के कत्र्तव्य विषय पर चर्चा की और गुरु के दिखाए गए मार्ग पर चलकर उच्च आदर्श स्थापित करने पर बल दिया और विद्यार्थियों द्वारा जिज्ञासावश पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी किया और उनको जीवन में सदगुणों को अपनाने हेतु प्रेरित किया। स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन पर वैदिक प्रश्नोत्तरी का आयोजन भी किया गय जिसमें जान्हवी ने अधिकाधिक प्रश्नों का उत्तर देकर प्रथम, वोनिका ने द्वितीय, सम्पिता ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली सभी छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए गए। अंत में डीन वैदिक अध्ययन डॉ. ममता ने सभी का धन्यवाद किया और विद्यार्थियों को ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढक़र भाग लेने हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्षा डॉ. ज्योति गोगिया व अन्य फैकल्टी सदस्य भी मौजूद रहे।
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