Thursday , 12 February 2026

‘दौर-ए-मोहब्बत’ ने सीटी ग्रुप में बिखेरा सूफ़ियाना सुरों का जादू

छात्र मशहूर कवयित्री रूप कौर कूनर द्वारा पेश सूफ़ी संगीत और शायरी के साथ हुए रूबरू

जालंधर (अरोड़ा) :- सीटी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के सरदारनी मंजित कौर ऑडिटोरियम में वैलेंटाइन वीक के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘दौर-ए-मोहब्बत’ ने विद्यार्थियों को भावनाओं, विचारों और आत्मचिंतन की एक अनूठी यात्रा पर ले गया। इस कार्यक्रम में प्रख्यात लेखिका, कवयित्री एवं गायिका रूप कौर कूनर ने अपनी सूफ़ियाना गायकी, गहन शायरी और प्रेरणादायी विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम साधारण वैलेंटाइन उत्सव से कहीं आगे बढ़ते हुए प्रेम, पहचान, जीवन-दर्शन और सामाजिक चेतना जैसे गहरे विषयों पर केंद्रित रहा। अपनी प्रसिद्ध कृतियों ‘अकीदा’ और ‘मिराकी’ की रचनात्मक संवेदना को मंच पर उतारते हुए रूप कौर कूनर ने संगीत और साहित्य के संगम से छात्रों को आत्मिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध किया। इस अवसर पर सीटी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मनबीर सिंह, डायरेक्टर स्टूडेंट वेलफेयर दविंदर सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. अर्जन सिंह सहित विभिन्न संस्थानों के प्रमुख उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की गरिमा को संबोधित करते हुए डॉ. मनबीर सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ भावनात्मक रूप से संतुलित और सांस्कृतिक रूप से जागरूक हों। रूप कौर कूनर जैसी सशक्त साहित्यिक हस्ती का सान्निध्य छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ता है और आधुनिक जीवन की चुनौतियों से जूझने की बौद्धिक स्पष्टता प्रदान करता है।” कार्यक्रम ने यह भी सिद्ध किया कि कविता और साहित्य युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन न केवल भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रखर करते हैं, बल्कि पंजाबी साहित्यिक विरासत को आधुनिक शैक्षणिक वातावरण में जीवंत बनाए रखते हैं। कार्यक्रम के समापन पर रूप कौर कूनर को छात्रों ने खड़े होकर तालियों के साथ सम्मानित किया। अपने अनुभव सांझा करते हुए उन्होंने कहा, “कला और कविता आत्मा का दर्पण हैं। ‘दौर-ए-मोहब्बत’ के माध्यम से मैं युवाओं को यह बताना चाहती थी कि प्रेम केवल भाव नहीं, बल्कि समझ, धैर्य और मानवीय चेतना का नाम है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का पंजाबी कविता से जुड़ना हमारे साहित्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।” सूफ़ी धुनों और प्रेरणादायक शब्दों की गूंज के साथ यह संध्या छात्रों के लिए यादगार अनुभव से भरपूर रही।

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