राणा रणबीर की प्रस्तुति ने छात्रों को आत्मचिंतन और नैतिक मूल्यों से जोड़ा
जालंधर (अरोड़ा) :- सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, शाहपुर कैंपस स्थित सरदारनी मनजीत कौर ऑडिटोरियम में लोकप्रिय नाटक ‘बंदे बनो बंदे’ का सशक्त मंचन किया गया। प्रसिद्ध पंजाबी कलाकार राणा रणबीर द्वारा लिखित व निर्देशित इस नाटक में उन्होंने राजवीर बोपराय के साथ मंच साझा किया। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर छात्रों के लिए एक गहन शैक्षणिक और जीवन उपयोगी अनुभव बनकर उभरी। नाटक ‘बंदे बनो बंदे’ पश्चाताप, आत्म-उत्तरदायित्व और प्रायश्चित जैसे गहरे सामाजिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। कथा का केंद्र एक ऐसा पात्र है, जिसे अपने स्वार्थपूर्ण अतीत के परिणामों का सामना करना पड़ता है। यथार्थपरक संवाद और सहज हास्य के माध्यम से यह नाटक दर्शकों को आत्ममूल्यांकन की प्रेरणा देता है और यह संदेश देता है कि वास्तविक परिवर्तन स्वयं की कमियों को स्वीकार करने से प्रारंभ होता है। इस अवसर ने शैक्षणिक परिवेश में रंगमंच की भूमिका को भी रेखांकित किया। इस प्रकार की प्रस्तुतियां छात्रों में संवेदनशीलता, सहानुभूति और आलोचनात्मक दृष्टि का विकास करती हैं।





मंच पर जीवन के यथार्थ को देखकर छात्र नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। अभिनय की दृष्टि से यह प्रस्तुति अत्यंत प्रभावशाली रही। राणा रणबीर और राजवीर बोपराय की सशक्त मंच उपस्थिति ने दर्शकों को बांधे रखा। राणा रणबीर की लेखनी में हास्य और भावनात्मक गंभीरता का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसने युवा दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम में सीटी ग्रुप के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। सरदार चरणजीत सिंह चन्नी (चेयरमैन), डॉ. मनबीर सिंह (मैनेजिंग डायरेक्टर), डॉ. शिव कुमार (डायरेक्टर कैंपस) तथा डॉ. अर्जन सिंह (डीन, स्टूडेंट वेलफेयर) इस अवसर पर उपस्थित रहे। अपने संबोधन में चेयरमैन सरदार चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “रंगमंच मानवीय मूल्यों का सशक्त माध्यम है। ‘बंदे बनो बंदे’ जैसे नाटक छात्रों को आत्मचिंतन और जिम्मेदारी का महत्व सिखाते हैं। कला युवाओं को बेहतर इंसान बनने की दिशा दिखाती है।” कार्यक्रम का समापन दर्शकों की खड़े होकर दी गई तालियों के साथ हुआ, जिसने इस प्रस्तुति की गहरी छाप को प्रमाणित किया।
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