केएमवी के छात्राओं ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक प्लांट टिशू कल्चर तकनीकों का किया अध्ययन

जालंधर (मोहित अरोड़ा) :- कन्या महा विद्यालय (स्वायत्त), स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा एम.एससी. बॉटनी की छात्राओं के लिए गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के बॉटनिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज विभाग और जैव-प्रौद्योगिकी विभाग की प्लांट टिशू कल्चर रिसर्च लैब में एक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्राओं को प्लांट टिशू कल्चर तकनीकों से संबंधित नवीनतम शोध कार्यों और उनके व्यावहारिक उपयोगों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर प्रदान करना था, जो आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्राओं के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव और प्लांट बायोटेक्नोलॉजी में प्रयुक्त उन्नत तकनीकों के संपर्क से सशक्त बनाना था, जिसमें पौधों का संवर्धन और आनुवंशिक हेरफेर शामिल है।

छात्राओं का स्वागत डॉ. रजिंदर कौर, प्रमुख, बॉटनिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज विभाग द्वारा किया गया। यह भ्रमण अनुसंधान प्रयोगशाला के एक मार्गदर्शित दौरे के रूप में आयोजित किया गया। जैव-प्रौद्योगिकी विभाग की पीएच.डी. स्कॉलर, नवप्रीत कौर और मंजींदर कौर ने प्लांट टिशू कल्चर का व्यापक परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने टिशू कल्चर की मूलभूत अवधारणाओं जैसे स्टेराइल तकनीकों का उपयोग, मीडिया की तैयारी और विभिन्न पौधों के ऊतकों से कल्चर की शुरुआत के बारे में जानकारी दी। छात्राओं ने कोशिका विभेदन, कालस निर्माण और इससे नई पौधों की उत्पत्ति की प्रक्रिया को जाना। उन्होंने कृषि और बागवानी में प्लांट टिशू कल्चर के महत्व को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से रोगमुक्त पौधों और आनुवंशिक रूप से उन्नत फसलों के बड़े पैमाने पर उत्पादन में सोमैटिक एंब्रायोजेनेसिस, माइक्रोप्रोपेगेशन और क्लोनिंग जैसी तकनीकों पर गहन चर्चा की गई, जिनकी क्षमता फसल उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में है। प्रयोगशाला ने टिशू कल्चर तकनीकों का उपयोग करते हुए विथानिया सोम्निफेरा, केला (मूसा), सेब (मैलस) आदि पौधों का सफलतापूर्वक संवर्धन किया है और विलुप्ति की कगार पर मौजूद रोडिओला प्रजातियों का संरक्षण कर जैव विविधता और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान दिया है। प्राचार्या प्रो. डॉ. अतीमा शर्मा द्विवेदी ने कहा कि इस शैक्षणिक भ्रमण ने छात्राओं की जैव प्रौद्योगिकी की कृषि, बागवानी और पर्यावरण संरक्षण में संभावनाओं की समझ को और अधिक विस्तृत किया। मैडम प्राचार्या ने बॉटनी विभाग के सफलतापूर्वक इस भ्रमण के आयोजन के लिए सराहना की।

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