जालंधर(अरोड़ा) :- एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स जालंधर के साइकोलॉजी विभाग द्वारा वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे
का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा ने इस दिवस विशेष की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को बताया कि संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 2012 से प्रतिवर्ष 21 मार्च को वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे मनाने का निर्णय लिया ताकि हम उन लोगों के प्रति संवेदनशील बन सके जिनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बचपन से ही बड़ी धीमी गति से होता है।



इस अवसर पर स्रोत वक्ता के रूप में काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट दामिनी तिवारी एवं तान्या उपस्थित हुई। मैडम दामिनी ने विद्यार्थियों को बताया कि डाउन सिंड्रोम से ग्रसित लोगों में हमें आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए मदद करनी होगी, किसी से उनकी तुलना नहीं करनी होगी। मैडम दामिनी ने Understanding Individual Differences विषय पर बात करते हुए कहा कि हमें प्रत्येक व्यक्ति की उसकी अपनी विशिष्टता एवं वैयक्तिकता को समझते हुए उनके साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना होगा ताकि वे स्वयं सफल जिंदगी जीने के साथ-साथ दूसरों को भी एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए सहायता कर सके। मैडम तान्या ने विद्यार्थियों को नशों के दुष्प्रभाव के बारे में बताते हुए उसकी उससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया, उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि नशे किस तरह से न केवल व्यक्ति की जिंदगी खराब करते हैं बल्कि उसकी पारिवारिक एवं सामाजिक जिंदगी को भी खत्म कर देते हैं। साइकोलॉजी विभाग के विद्यार्थियों ने इन दोनों व्याख्यानों को बड़ी रुचि के साथ सुना और इसमें अपनी जिज्ञासाएं भी व्यक्त की जिनका दोनों स्रोत वक्ताओं ने संतोषप्रद उत्तर दिया। इस कार्यक्रम में साइकोलॉजी फोरम के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड गुरसाहिब सिंह थिंद एवं उपाध्यक्ष कृतज्ञा ने मंच संचालन करते हुए
कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया। साइकोलॉजी फोरम के अध्यक्ष संदीप सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। डॉ ढींगरा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए साइकोलॉजी विभाग की मैडम निहारिका एवं मैडम हरप्रीत कौर के प्रयासों की सराहना की।