डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर की संस्थागत नवाचार परिषद् द्वारा ‘विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस’ का आयोजन

जालंधर (अरोड़ा) :- प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के कुशल नेतृत्व में डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर द्वारा ‘विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस’ अत्यन्त उत्साह एवं सृजनात्मकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर द्विदिवसीय जागरूकता सत्रों तथा छात्र-गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवोन्मेष तथा समस्या-समाधान कौशल का विकास करना था। इस कार्यक्रम का संयोजन संस्थागत नवाचार परिषद् के संयोजक डॉ. राजीव पुरी, बौद्धिक संपदा अधिकार समन्वयक डॉ. आशु बहल तथा प्रो. जस्मीन कौर द्वारा किया गया। जागरूकता सत्रों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित संस्थागत नवाचार परिषद् की गतिविधियों, बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्त्व तथा नवीन विचारों को उपयोगी उत्पादों एवं सेवाओं में रूपांतरित करने की प्रक्रिया से परिचित कराना था। चर्चाओं को अधिक प्रभावशाली एवं प्रासंगिक बनाने हेतु विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं, प्रेरणादायक नवोद्यमों की सफलता-कथाओं तथा भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से जुड़े प्रेरक उदाहरणों से अवगत कराया गया। इन उदाहरणों ने विद्यार्थियों को सृजनात्मक रूप से विचार करने तथा दैनिक जीवन की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। इस समारोह का प्रमुख आकर्षण “नवाचार भित्ति” गतिविधि रही, जिसका शीर्षक था—“मैं इसे सुधार सकता हूँ : छोटे विचार, बड़ा प्रभाव।” लगभग बीस विद्यार्थियों ने इस गतिविधि में अत्यधिक उत्साह के साथ सहभागिता की तथा अपने नवीन विचारों एवं सुझावों को भित्ति पर प्रदर्शित किया। यह गतिविधि युवा मस्तिष्कों के लिए व्यावहारिक एवं सामाजिक रूप से उपयोगी अवधारणाओं को सांझा करने का एक सजीव मंच सिद्ध हुई।

विद्यार्थियों ने त्वरित प्रतिक्रिया संकेत (क्यूआर कोड) आधारित स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली, अल्प-व्ययी वर्षा-जल संचयन प्रतिरूप, प्लास्टिक पैकेजिंग के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तथा ग्रामीण क्षेत्रों हेतु सौर ऊर्जा संचालित आवेशण केन्द्रों जैसे अभिनव विचार प्रस्तुत किए। एस.एस.सी.-द्वितीय चिकित्सा वर्ग की छात्रा अंशिका द्वारा प्रस्तुत पुरस्कार-विजेता विचार ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि वह पर्यावरणीय स्वच्छता एवं नागरिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में अत्यन्त प्रासंगिक था। इस विचार के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने वाले व्यक्तियों की पहचान हेतु सड़कों के किनारे स्मार्ट संवेदक तथा निगरानी प्रणालियाँ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था। पहचान होने पर यह प्रणाली स्वतः ही दोषी व्यक्ति को चेतावनी अथवा दंड-पत्र जारी कर देगी। इस अवधारणा का उद्देश्य स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल वातावरण को प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों को सार्वजनिक स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रेरित करना था। निर्णायकों ने इस विचार की विशेष सराहना की, क्योंकि इसमें प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का अत्यन्त व्यावहारिक तथा प्रभावशाली समन्वय देखने को मिला। इन विचारों का मूल्यांकन संस्थागत नवाचार परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश अरोड़ा तथा अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता डॉ. शरणजीत संधू द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित मौलिकता, सृजनात्मकता तथा समस्या-समाधान दृष्टिकोण की अत्यधिक प्रशंसा की। साथ ही प्रतिभागियों को अपने विचारों को निरंतर परिष्कृत करने तथा भविष्य में उन्हें सार्थक परियोजनाओं के रूप में विकसित करने हेतु प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने भी विद्यार्थियों के अभिनव विचारों की सराहना करते हुए उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए। यह समारोह एक प्रेरणादायी संदेश के साथ संपन्न हुआ, जिसने विद्यार्थियों को अपने आसपास की सामाजिक समस्याओं के प्रति सजग रहने, सृजनात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से मौलिक विचारों के संरक्षण एवं संवर्धन के महत्त्व को समझने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया।

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