जालंधर (अरोड़ा) :- हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर ने अपने गौरवशाली 100 वर्षों में प्रवेश के उपलक्ष्य में एक भव्य शत्कुण्डीय महायज्ञ का आयोजन कर एक अद्भुत, दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला के कुशल एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन में आयोजित इस पावन कार्यक्रम ने महाविद्यालय परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया, जहाँ केसरिया रंगों से सुसज्जित वातावरण ने उत्सव को विशेष गरिमा प्रदान की। इस शुभ अवसर पर माननीय जस्टिस (सेवानिवृत्त) एन.के. सूद, चेयरमैन लोकल एडवाइजरी कमेटी, अरुणिमा सूद, डॉ. जे.पी. शूर, अध्यक्ष, आर्य प्रदेशिक प्रतिनिधि उपसभा, पंजाब, लोकल एडवाइजरी कमेटी के सदस्यगण प्राचार्य इंदरजीत तलवार, एस.पी. सहदेव तथा डॉ. सुषमा चावला सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने समस्त एचएमवी परिवार को इस ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का शताब्दी वर्ष में प्रवेश करना अत्यंत सौभाग्य की बात है और इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि इस महायज्ञ का आयोजन संस्था के 100वें वर्ष के शुभारंभ का सबसे उपयुक्त एवं सार्थक माध्यम है, जो उत्सव के साथ-साथ शुद्धि, सकारात्मकता, आध्यात्मिक जागरण एवं सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक है। यज्ञ में दी गई आहुतियों की पवित्र सुगंध ने पूरे वातावरण को दिव्यता, शांति एवं आत्मिक आनंद से भर दिया। अपने संदेश में जस्टिस (सेवानिवृत्त) एन.के. सूद ने समस्त एचएमवी परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इस भव्य एवं सार्थक आयोजन का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। डॉ. जे.पी. शूर ने प्राचार्या, स्टाफ एवं छात्राओं को उत्कृष्टता और संस्कारों की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी को सच्चे अर्थों में आर्य बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आर्य वह है जो सदैव श्रेष्ठ बनने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि डीएवी के महाऋषियों द्वारा रोपित वटवृक्ष आज विशाल रूप ले चुका है और एचएमवी जैसे संस्थान उसकी शाखाओं के रूप में शिक्षा, संस्कृति, अनुशासन एवं राष्ट्र निर्माण की भावना को निरंतर पोषित कर रहे हैं। उन्होंने महात्मा हंसराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निस्वार्थ सेवा, समर्पण एवं शिक्षा के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। इसी क्रम में प्राचार्य इंदरजीत तलवार ने भी राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को डीएवी संस्थाओं की आधारशिला बताते हुए एचएमवी द्वारा इस मिशन को गरिमा एवं उत्कृष्टता के साथ आगे बढ़ाने की सराहना की। इस ऐतिहासिक अवसर पर महाविद्यालय के आधिकारिक 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बनाए गए विशेष स्मृति चिन्हों का विमोचन भी किया गया, जो संस्थान की गौरवशाली विरासत एवं दूरदर्शी भविष्य का प्रतीक है। इसके साथ ही एक एलईडी पैनल की स्थापना एवं महाविद्यालय के नए प्रवेश द्वार का उद्घाटन भी किया गया, जो संस्थान की प्रगति के नए अध्याय का संकेत है। मॉस कम्यूनिकेशन विभाग द्वारा एच.एम.वी. के 100 वर्षों को दर्शाता एक वीडियो भी जारी किया गया। यज्ञ के दौरान डॉ. मीनू तलवाड़, पंडित जयप्रकाश एवं पंडित हंसराज जी द्वारा मंत्रोच्चारण किया गया। इस अवसर पर लगभग 250 सदस्यों का भव्य समूह चित्र भी लिया गया, जिसने एचएमवी परिवार की एकता, गौरव एवं अपनत्व को सजीव रूप में दर्शाया और इस ऐतिहासिक क्षण को सदैव के लिए स्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ, प्रसाद वितरण एवं एचएमवी परिवार के उत्साहपूर्ण जयघोष के साथ अत्यंत आध्यात्मिक एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ, जिसने उपस्थित सभी जनों के मन में गर्व एवं भावनात्मक जुड़ाव की अनुभूति को और गहरा कर दिया। कार्यक्रम को ओर अधिक मधुर एवं आकर्षक बनाने में संगीत विभाग ने अपनी मंत्रमुग्ध प्रस्तुतियों से विशेष योगदान दिया, जिससे पूरे आयोजन में भक्ति, सौंदर्य एवं उल्लास का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। समस्त कार्यक्रम का आयोजन डीन वैदिक सभा डॉ ममता एवम इंचार्ज आर्य युवती सभा डॉ मीनू तलवाड़ के संरक्षण में सफलतापूर्ण सम्पन्न हुआ। मंच संचालन का कार्यभार डॉ अंजना भाटिया द्वारा निभाया गया। यह भव्य महायज्ञ एचएमवी के गौरवशाली अतीत, प्रेरणादायक वर्तमान एवं उज्ज्वल भविष्य को समर्पित एक अद्वितीय आयोजन रहा, जिसने शताब्दी वर्ष के शुभारंभ को आध्यात्मिक गरिमा, सांस्कृतिक समृद्धि, संस्थागत गौरव एवं उत्कृष्टता के प्रति पुन: संकल्प के साथ चिह्नित किया।
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