जालंधर (कुलविंदर) :- दर्शन अकादमी में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के तत्वावधान में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था- शिक्षकों के लिए अनुभवात्मक अधिगम। कार्यशाला के
संसाधन व्यक्ति रहे — – रसिक गुप्ता (प्राचार्य, दर्शन अकादमी, दसूहा) – अंजु मेहता (प्राचार्या, स्वामी संत दास पब्लिक स्कूल, फगवाड़ा) विद्यालय के प्राचार्य श्री दिनेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें संसाधन व्यक्तियों के साथ दिनेश सिंह जी ने सहभागिता की। गुप्ता ने अनुभवात्मक अधिगम की संकल्पना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ती है और उनके सीखने को अधिक सार्थक बनाती है।



उन्होंने Bloom’s Taxonomy के तीन अधिगम क्षेत्रों — ज्ञानात्मक (Cognitive), भावात्मक (Affective), और क्रियात्मक (Psychomotor) — की व्याख्या की तथा यह भी बताया कि इन्हें किस प्रकार पाठ योजनाओं में समाहित किया जा सकता है। अंजु मेहता ने बहुबुद्धिमत्ता (Multiple Intelligences) की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि परियोजना आधारित शिक्षण के माध्यम से विभिन्न प्रकार की बुद्धिमत्ताओं को विकसित किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को उदाहरणों के साथ यह समझाया कि किस प्रकार विद्यार्थियों की विविध क्षमताओं को पहचानकर उन्हें शिक्षण प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इस कार्यशाला में अनेक विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान अनेक रोचक गतिविधियां करवाई गई।सभी प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत लाभकारी बताया क्योंकि इससे उन्हें शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में नए दृष्टिकोण प्राप्त हुए। यह कार्यशाला शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रही, जिसने उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु नए आयामों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।
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