एपीजे एजुकेशन जालंधर द्वारा योगेश्वर कृष्ण लीलाओं को समर्पित नृत्य- नाटिका ‘कृष्णम’ का चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में भव्य आयोजन

जालंधर (अरोड़ा) :- एपीजे एजुकेशन जालंधर समय-समय पर सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करते हुए ललित कलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। एपीजे एजुकेशन का उद्देश्य जहां एक तरफ अपनी समृद्ध संस्कृति को जनमन तक पहुंचाना है वहां दूसरी तरफ न केवल विद्यार्थियों बल्कि शिक्षकगण की प्रतिभा को नये आयाम देने का प्रयास करना भी है। एपीजे एजुकेशन राजेश्वरी सत्या ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को दिखाने का मंच तो प्रदान करता ही है इसके साथ ही देश के प्रतिष्ठित ऑडिटोरियम में भी समय-समय पर श्रेष्ठ कार्यक्रमों का आयोजन करके उन्हें सपनों के आकाश में उड़ने का हौसला भी देता है। इसी श्रृंखला में एपीजे एजुकेशन द्वारा योगेश्वर कृष्ण की लीलाओं को समर्पित ‘कृष्णम’ नृत्य-नाटिका का बड़े ही शानदार ढंग से 1 मार्च 2026 को टैगोर थियेटर चंडीगढ़ में आयोजन किया गया।


एपीजे एजुकेशन की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा ने उपस्थित अतिथिवृंद का अभिनंदन करते हुए बताया कि योगेश्वर कृष्ण की लीलाओं पर आधारित ‘कृष्णम’ नृत्य-नाटिका का टैगोर थिएटर में मंचन एपीजे एजुकेशन एवं एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप की अध्यक्ष तथा एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती सुषमा पॉल बर्लिया के संरक्षण एवं मार्गदर्शन से ही संभव हो पाया है।भारत की समृद्ध संस्कृति एवं विरासत को सहेजने की उनकी दूरदर्शिता ने एवं एपीजे शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों की प्रतिभा को नया आयाम देने के लिए वह देश के विभिन्न कोनों में ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को करने की हमेशा प्रेरणा देती रहती है।

डॉ सुचरिता ने बताया कि हमारे संस्थापक अध्यक्ष डॉ सत्यपाॅल जी का जीवन श्री कृष्ण की शिक्षाओं का साक्षत् प्रमाण है वे सच्चे कर्मयोगी, अपने कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध, जीवन के अंतिम चरणों तक कर्म करते रहने में संलग्न एवं विनम्रता से भरपूर व्यक्तित्व थे। कृष्णम’नृत्य-नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति में एपीजे शिक्षण संस्थाओं के 60 कलाकारों द्वारा 14 कृष्ण लीलाओं ‘कृष्ण जन्म’, ‘कृष्ण द्वारा कालिया मर्दन’, ‘राधा-कृष्ण’ प्रेम की पावनता, ‘कृष्ण की गोपियों संग रासलीला एवं होली खेलने का प्रसंग’, ‘पांडव द्यूत क्रीडा’, ‘द्रौपदी चीरहरण’, ‘मीराबाई का कृष्ण प्रेम में अनन्य समर्पण’, एवं श्री कृष्ण अपने सिर पर मोर पंख क्यों धारण करते हैं और कृष्ण द्वारा बांसुरी धारण करने की पवित्र कथा की अलौकिक प्रस्तुति दिखाई गई। ‘कृष्णम’; नृत्य-नाटिका की सफल प्रस्तुति में संगीत रचना, गायन, वादन,नाटकीय प्रस्तुति, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग, स्क्रीन विजुअल डिजाइनिंग एवं मेकओवर सब कुछ एपीजे शिक्षण संस्थानों के टीचर्स और विद्यार्थियों द्वारा ही किया गया है।

‘कृष्णम’ नृत्य-नाटिका में मुख्य अतिथि के रूप में विवेक प्रताप सिंह एवं विशेष अतिथि के रूप में नौनिहाल सिंह एवं गरिमा सिंह उपस्थित हुए। ‘कृष्णम’ की सफलतापूर्वक प्रस्तुति के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए हरियाणा सरकार के सलाहकार एवं खादी तथा विलेज इंडस्ट्री बोर्ड यूटी के सदस्य डॉ सिद्धार्थ शर्मा ने अपनी विशेष भूमिका निभाई। एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स जालंधर की प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा ने उपस्थित अतिथिवृंद एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया।

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