जालंधर (कुलविंदर) :- दर्शन अकादमी जालंधर विद्यालय में शिक्षकों के लिए दर्शन एजुकेशन फाउंडेशन की क्षेत्र प्रमुख डिंपल महिंद्रा जी, संसाधन व्यक्ति (Resource Person)के निर्देशन में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया ,जिसका विषय था – विभिन्न अधिगम“Differentiated Learning – One Size Does Not Fit All”। इस 60 मिनट की कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना था कि किस प्रकार वे कक्षा में विविध विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विषय-वस्तु (Content), प्रक्रिया (Process) और उत्पाद (Product) में भिन्नता ला सकते हैं। कार्यशाला में महिंद्रा जी ने अधिगम के अनेक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और कई मुख्य बातें साझा कीं जैसे-विद्यार्थियों की तैयारी, रुचियाँ, सीखने की शैली और वातावरण अलग-अलग होते हैं। भिन्नीकृत अधिगम से हर विद्यार्थी को सीखने का अवसर मिलता है, न कि केवल उच्च उपलब्धि प्राप्त करने वालों को। सामग्री में भिन्नता: एक ही विषय को अलग-अलग स्तर और उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करना। प्रक्रिया में भिन्नता: Six Thinking Hats® पद्धति का प्रयोग कर तथ्यों, भावनाओं, सावधानी, लाभ, रचनात्मकता और चिंतन पर आधारित प्रश्न पूछना। उत्पाद में भिन्नता: विद्यार्थियों को अपनी समझ अभिनय, चित्रण, लेखन, संगीत, मॉडल निर्माण आदि के माध्यम से व्यक्त करने का विकल्प देना। सीखने का वातावरण: लचीली बैठने की व्यवस्था, समूह कार्य और व्यक्तिगत कार्य का संतुलन।कार्यशाला के बाद शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे: अपने पाठ्यक्रम से एक विषय चुनें। कम से कम 2–3 Six Thinking Hats® आधारित प्रश्न तैयार करें। विद्यार्थियों को न्यूनतम 2 उत्पाद विकल्प दें। इसके अलावा श्रीमती डिंपल महिंद्रा जी ने शिक्षकों से इस बात पर भी ध्यान देने को कहा कि मूल्यांकन में समानता पर नहीं, बल्कि समझ पर ध्यान दें। कार्यशाला में शिक्षकों ने अनेक प्रकार की गतिविधियों में भाग लिया और अपना शिक्षण कौशल प्रदर्शित किया। “हर विद्यार्थी सीख सकता है, पर एक ही तरीके से नहीं। विकल्प, चुनौती और स्पष्टता ही शिक्षा को समावेशी बनाते हैं।” इस कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा। कार्यशाला में दर्शन अकादमी जालंधर की दोनों शाखाओं के शिक्षक और प्रधानाचार्य मौजूद रहे।
JiwanJotSavera