जालंधर (अरोड़ा) :- अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस के अवसर पर पिमा अस्पताल, जालंधर की कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुरभि महाजन ने मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और रामप पर विकित्सा परामर्श के महत्व पर जोर दिया। मिर्गी एक दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। यह विश्वभर में लाखों तोगों को प्रभावित करती है, जिसमें भारत की बड़ी आबादी भी शामिल है। डॉ. महाजन ने बताया कि आम बीमारी होने के बावजूद मिर्गी को लेकर समाज में गलत धारणाएं फैली हुई है, जिसके कारण मरीजों को सामाजिक भेदभाव, इलाज में देरी और अनावश्यक भय का सामना करना पड़ता है। डॉ. सुरभि महाजन ने कहा, मिर्गी न तो कोई मानसिक रोग है और न ही यह संक्रामक है। सही इलाज और निपमित दवाइयों से अधिकांश मामतों में मिर्गी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। उचित उपचार और जीवनशैली संबंधी सलाह से मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।” उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में समय पर निदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि मिर्गी का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह शिक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने परिवारजनों और देखभाल करने वालों से अपील की कि बार-बार बेहोशी, अचानक झटके या असामान्य गतिविधियों जैसे तक्षण दिखाई देने पर तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।मिर्गी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए डॉ. महाजन ने कहा कि मिर्गों से पीड़ित व्यक्ति उचित चिकित्सकीय देखभाल के साथ शिक्षा, नौकरी, विवाह और अभिभावक बनने जैसे सभी पहलुओं में सामान्य जीवन जी सकते हैं। साथ ही उन्होंने दौरे के समय प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की जानकारी को भी अत्यंत आवश्यक बताया, जिससे दुर्घटनाओं और चोटों से बचा जा सकता है। डॉ. महाजन ने आगे कहा, ” अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर हमारा उद्देश्य वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना, समाज में संवेदनशीलता लाना और मिर्गी से जुड़े मिथकों को समाप्त करना है, ताकि मरीज सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकें।” पिम्स अस्पताल, जालंधर मिर्गी सहित सभी न्यूरोलॉजिकल रोगों के लिए उन्नत जांच, व्यक्तिगत उपचार और निरंतर मरीज जागरूकता के माध्यम से समर्पित सेवाएं प्रदान कर रहा है। विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिकल परामर्श के लिए मरीज पिम्स अस्पताल, जालंधर में संपर्क कर सकते हैं।
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