छात्रों और शिक्षकों ने बसंत के उल्लास का स्वागत किया, आसमान रंगों से भर उठा
जालंधर (अरोड़ा) :- सी टी विश्वविद्यालय ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर छात्र कल्याण प्रभाग द्वारा आयोजित भव्य पतंग उड़ान उत्सव के माध्यम से अत्यंत उत्साह और सांस्कृतिक भावना के साथ यह पर्व मनाया। यह आयोजन बसंत ऋतु के आगमन का सुंदर स्वागत था, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय के नेतृत्व की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। “बसंत के आगमन को अपनाएं और अपनी पतंगों को ऊँचाइयों तक उड़ने दें” विषय पर आयोजित इस उत्सव में कुलपति एस. चरनजीत सिंह चन्नी; प्रो-कुलपति डॉ. मनबीर सिंह; उपाध्यक्ष हरप्रीत सिंह; कुलसचिव डॉ. नितिन टंडन; प्रो-कुलसचिव डॉ. सिमरनजीत कौर गिल; पंजीयक संजय खंडूरी; तथा छात्र कल्याण निदेशक इंजीनियर दविंदर सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने छात्रों के साथ मिलकर इस रंगारंग पर्व का आनंद लिया। विश्वविद्यालय परिसर एक जीवंत रंगमंच में बदल गया, जहाँ आकाश में विभिन्न रंगों, आकारों और प्रकार की पतंगें उड़ती दिखाई दीं।

छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ पतंग उड़ाई, पारंपरिक संगीत का आनंद लिया और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा। पूरे परिसर में खुशी, ऊर्जा और आपसी सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। सभा को संबोधित करते हुए कुलपति एस. चरनजीत सिंह चन्नी ने शैक्षणिक संस्थानों में सांस्कृतिक पर्वों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समग्र शिक्षा के प्रति सी टी विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि ऐसे आयोजन परंपरा और आधुनिक परिसर जीवन को जोड़ते हैं और छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व करने वाले प्रो-कुलपति डॉ. मनबीर सिंह ने छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ छात्र कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ सकारात्मक, समावेशी और जीवंत परिसर वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। छात्र कल्याण प्रभाग ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से सुनिश्चित कीं और सभी के लिए इस उत्सव को यादगार बनाया। सी टी विश्वविद्यालय में आयोजित बसंत पंचमी समारोह ने न केवल छात्रों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ा, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय समुदाय के बीच एकता, आनंद और अपनत्व की भावना को भी सशक्त किया।
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