बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए जालंधर प्रशासन पूरी तरह तैयार: डिप्टी कमिश्नर

कहा, घबराने की जरूरत नहीं, जिले में बाढ़ का कोई खतरा नहीं शाहकोट के संभावित बाढ़ क्षेत्र में किया गया मॉक ड्रिल जिले में राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित, 54 राहत कैम्प की पहचान

जालंधर (अरोड़ा) :- डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि जिला प्रशासन बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि भले ही जिले में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि जिला प्रशासन बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि जिले में फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है, फिर भी जिले के अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित एस.डी.एम. व्यक्तिगत तौर पर क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा ले रहे है और लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि शाहकोट सब-डिवीजन के संभावित बाढ़ क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा एस.डी.एम. शाहकोट शुभी आंगरा के नेतृत्व में मॉक ड्रिल करवाया गया। इससे पहले 8 जुलाई को फिल्लौर में भी एक मॉक ड्रिल करवाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि इस मॉक ड्रिल के दौरान जहां प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने का अभ्यास किया जाता है, वहीं ऐसी स्थिति के लिए तैयारियों को और मजबूत किया जाता है। इसके अलावा, बाढ़ जैसी स्थिति में प्रभावित लोगों द्वारा उठाए जाने वाले जरूरी कदमों के बारे में भी जागरूक किया जाता है। डा. अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशानुसार, पंजाब में बाढ़ की किसी भी संभावित स्थिति से निपटने और प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाने के लिए जालंधर के सर्किट हाउस में एक राज्य स्तरीय बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहा है। सरकार द्वारा एक आपातकालीन नंबर 0181-2240064 भी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाढ़ की रोकथाम और प्रबंधन को और मजबूत करना है। इसके अलावा, जिला प्रशासन द्वारा पहले ही जिला स्तर पर एक बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसका फोन नंबर 0181-2224417 है। उन्होंने बताया कि बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए जिले में 54 राहत शिविरों की पहचान भी कर ली गई है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि सतलुज नदी में पानी का स्तर बढ़ने के कारण यदि बाढ़ जैसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रशासन बिना किसी देरी के राहत कार्य शुरू करने के लिए उचित व्यवस्था और तैयारियों से लैस है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास पर्याप्त संख्या में रेत के बैग, आवश्यक मशीनरी और रेस्क्यू टीमें तैयार हैं। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि नावें, लाइफ जैकेट, तिरपाल, पानी निकालने वाले पंप सहित आवश्यक मशीनरी उपलब्ध है। इसके अलावा, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा चुकी है, वहीं एन.डी.आर.एफ., एस.डी.आर.एफ. और सेना के साथ भी तालमेल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि दवाइयों आदि का प्रबंध कर लिया गया है, जिसका जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी, वहीं कृषि विभाग द्वारा पशुओं के लिए चारे आदि की व्यवस्था भी की जाएगी।

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