कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने फसल विविधता पर दिया जोर

जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कैम्प में 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आएं किसान : हलका विधायक बलकार सिंह

जालंधर (अरोड़ा) :- किसानों को सावन 2025 की फसल के बारे में तकनीकी जानकारी देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आज दाना मंडी करतारपुर में जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कैम्प का आयोजन किया गया, जिसमें 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। मेले में बागवानी, स्वतंत्रता सेनानी एवं रक्षा सेवाएं कल्याण मंत्री मोहिंदर भगत मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल हुए और मेले का उद्घाटन हलका विधायक करतारपुर बलकार सिंह ने किया। इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) बुद्धिराज सिंह विशेष तौर पर उपस्थित थे। किसानों की सभा को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि पंजाब सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषि को मजबूत कर रही है। उन्होंने किसानों को फसल चक्र से बाहर निकलने और फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि वैकल्पिक खेती समय की मुख्य जरूरत है। उन्होंने किसान मेलों का महत्व बताते हुए कहा कि ऐसे मेले किसानों के लिए कारगर साबित हो रहे हैं, क्योंकि यहां से किसानों को खेती की नई तकनीकों के बारे में भी पता चलता है। कैबिनेट मंत्री ने किसानों से खेती के व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाने के लिए कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित बीज, उर्वरक और दवाओं का ही उपयोग करने की भी अपील की। उन्होंने किसानों को सहायक व्यवसाय अपनाने पर भी जोर दिया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भूमि की उर्वरता एवं पर्यावरण की शुद्धता बनाये रखने के लिए किसानों को गेहूं एवं अन्य फसलों के अपशिष्ट को नहीं जलाना चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग को जिले में धान एवं अन्य अपशिष्ट जलाने से रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि आग लगाने से धरती की ऊपरी परत में मौजूद मित्र कीट और जमीन में मौजूद तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर और कार्बनिक पदार्थ भी नष्ट हो जाते हैं। हलका विधायक बलकार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसानों को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों को गेहूं की पराली को आग लगाने की बजाय सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई मशीनरी से इसका उचित प्रबंधन करना चाहिए। उन्होंने किसानों से आधुनिक एवं वैकल्पिक खेती करने की भी अपील की।उन्होंने कृषि विभाग, सहयोगी विभागों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का भी निरीक्षण किया। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि डीएसआर योजना वर्ष 2024-25 के दौरान जिला जालंधर के 141 किसानों ने 1334 एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बुआई की। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार कुल 20,01,000 की राशि किसानो के खाते में डाली जा चुकी है। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. रणधीर सिंह ठाकुर ने कहा कि 2025 सीजन के दौरान 45,00 हेक्टेयर में मक्का, 15,000 हेक्टेयर में बासमती, 12,500 हेक्टेयर में गन्ने की बुआई होगी। उन्होंने कहा कि सावन 2025 के लिए किसानों के लिए मक्का, धान, बासमती, दलहन आदि फसलों के लिए विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण बीजों की व्यवस्था की जा रही है। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र नूरमहल के विशेषज्ञों ने सावन की फसल की खेती, कीड़ों और बीमारियों के बारे में तकनीकी जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि, उद्यान, पशुपालन, जल एवं भूमि संरक्षण समेत विभिन्न ब्लाक से 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कैम्प के दौरान किसानों द्वारा अपनी उपज के स्टॉल भी लगाए गये। इसके अलावा कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें किसानों को कृषि यंत्रों की तकनीकी जानकारी दी गई। इस प्रदर्शनी में डॉ. नरेंद्र कलसी उप निदेशक बागवानी, डॉ. सुरजीत सिंह (एपीपीओ), डॉ. जसबीर सिंह कृषि अधिकारी (सदर मकाम), डॉ. अमरीक सिंह कृषि विकास अधिकारी और डॉ. कृषि विकास अधिकारी अनीश चंद्र ने भी किसानों को कृषि के संबंध में उचित सुझाव दिए। कैम्प में किसान नेता गुरविन्दर सिंह ग्राम लल्लियाँ कलां ने भी किसानों को कृषि विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए सम्बोधित किया।

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