संत सीचवाल ने 1974 के ‘वाटर एक्ट’ को मजबूत करने का मुद्दा संसद में उठाया

नदियों में बढ़ते प्रदूषण को बताया गंभीर मामला केंद्र और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया सफेद हाथी शुद्ध हवा, पानी और आहार लोगों का संवैधानिक मौलिक अधिकार

जालंधर (अरोड़ा) :- देश की नदियों और दरियाओं में बढ़ते प्रदूषण का मामला संसद में गंभीरता से उठाते हुए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचवाल ने 1974 के वाटर एक्ट को सख्त बनाने और इसमें सजा के प्रावधान को हाथी बताते हुए कहा कि उनकी लापरवाही के कारण आज देश की नदियाँ और दरिया बुरी तरह से प्रदूषित हो चुकी हैं। उन्होंने सिफर काल के दौरान नदियों में बढ़ते प्रदूषण को एक गंभीर चिंता का विषय बताया। संत सीचवाल ने वाटर एक्ट 1974 में संशोधन कर उसमें से सजा देने के प्रावधान को हटाने की कठोर शब्दों में निं से लोग कैंसर सहित अन्य खतरनाक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार और बाद में राज्य सरकार ने 1974 के वाटर एक्ट में संशोधन कर नदियों को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों को एक तरह से खुली छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि पानी मानव अस्तित्व से जुड़ा हुआ अत्यंत गंभीर मामला है। पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस कानून के कमजोर होने से फैक्ट्रियों के मालिकों का जो भय था, वह भी समाप्त हो गया है। संत सीचवाल ने कहा कि पानी का अधिकार केवल मनुष्य का नहीं है, बल्कि इस पर वनस्पतियों, पशुओं और पक्षियों का भी पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और शुद्ध आहार लोगों का संवैधानिक मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाली तीन संस्थाएँ हैं, शहरी क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र और फैक्ट्रियाँ, और इन्हें रोकने वाली भी तीन संस्थाएँ हैं, ड्रेनेज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम, जो सभी बुरी तरह से नाकाम साबित हो रही हैं। संत सीचवाल ने कहा कि हमारे देश की परंपराएँ बहुत उच्च हैं, क्योंकि लोग नदियों की पूजा करते आए हैं। गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी, घग्गर, बुड्ढा दरिया और तुंगधाब नाला आदि बुरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं। इन्हें लोगों की भागीदारी से ही साफ किया जा सकता है।

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देश की नदियों को साफ करने के लिए बाबे नानक की बेईं सफल मॉडल बाबे नानक की पवित्र नदी को संगतों के सहयोग से साफ करने वाले संत सीचवाल ने कहा कि पवित्र वेईं में 8 शहरों और 45 गांवों का गंदा पानी गिरता था, जिसे सीचवाल मॉडल के तहत रोका गया। उन्होंने सदन में कहा कि बाबे नानक की साफ हुई नदी देश की नदियों को साफ करने का एक सफल मॉडल है, जिसे लोगों की भागीदारी से ही साफ किया गया है और इस मॉडल को पूरे देश की नदियों को साफ करने
के लिए अपनाए जाने की आवश्यकता है।

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