जालंधर (अरोड़ा) :- राजेश्वरी कला संगम,एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स जालंधर की स्वर्ण जयंती एवं छठे राजेश्वरी कला-महोत्सव के महाकुंभ के अनूठे आगाज़ ने कलादिग्गज़ों को भाव विभोर कर दिया। इस भव्य-समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब के माननीय राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया उपस्थित हुए। इस अद्भुत स्वर्णिम-उत्सव की अध्यक्षता एपीजे एजुकेशन,एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप की अध्यक्ष तथा एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी की चांसलर सुषमा पॉल बर्लिया ने की। एपीजे सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप की को-ओनर एंड डायरेक्टर सत्या एंड स्वर्ण ग्रुप, लीड-एजुकेशन वर्टिकल-एपीजे एजुकेशन, प्रो चांसलर एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी डॉ नेहा बर्लिया की ऊर्जापूर्ण उपस्थिति ने इस समागम को सफल बनाने में सार्थक भूमिका निभाई। सुषमा पॉल बर्लिया एवं डॉ नेहा बर्लिया ने माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को सुगंधित पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।कॉलेज की छात्राओं ने पंजाब के पारंपरिक लोक नृत्य गिद्दे की बोलियों के साथ कटारिया का स्वागत किया। माननीय राज्यपाल गुलाबचंद, सुषमा पॉल बर्लिया एवं डॉ नेहा बर्लिया ने अपने कर-कमलों से छठे राजेश्वरी कला महोत्सव एवं स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया। स्वर्ण जयंती के पावन अवसर पर लुप्त प्राय होती जा रही कलाओं वरलीआर्ट,गोंड आर्ट,मिनिएचर पेंटिंग, मधुबनी पेंटिंग, खरड़ वीविंग, पिपली, पॉटरी, टेराकोटा, स्कल्पचर्स, ब्लॉक प्रिंटिंग, वुड कार्विंग एवं वुड इनले आदि की वर्कशॉप का उद्घाटन भी सुबह किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब आर्ट काउंसिल चंडीगढ़ के अध्यक्ष कॉलेज के ही एल्यूमनाइ स्वर्णजीत सावी उपस्थित हुए। विशेष अतिथि के रूप में पहाड़ी मिनिएचर आर्टिस्ट एंड आर्ट हिस्टोरियन पद्म सम्मान से सम्मानित विजय शर्मा उपस्थित हुए। एपीजे एजुकेशन जालंधर की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा एवं एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स जालंधर की प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा ने उनका भव्य स्वागत किया तथा स्वर्ण-जयंती की यात्रा को सफल बनाने में अपनी सार्थक भूमिका निभाने के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया। स स्वर्णजीत सावी जोकि एक प्रतिष्ठित कवि,मूर्तिकार, चित्रकार एवं लेखक भी है; उन्होंने कहा कि साहित्य एवं कला में इतनी सामर्थ्य है कि वह आपकी जिंदगी की सोच बदलकर आपके जीवन को एक सकारात्मक दिशा दे सकता है। विशेष अतिथि श्री विजय शर्मा ने कहा कि हमें अपनी लुप्तप्राय:होती जा रही कलाओं को जीवंत करने के लिए सजग रहकर प्रयास करना होगा।
गुलाबचंद कटारिया जी, सुषमा पॉल बर्लिया जी एवं डॉ नेहा बर्लिया ने स्कल्पचर विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष बासुदेव बिश्वास द्वारा कॉलेज की स्वर्णिम-यात्रा के सफर को दर्शाती इंस्टॉलेशन का लोकार्पण भी किया। भारत के विभिन्न प्रदेशों उड़ीसा, मध्यप्रदेश, हिमाचल, पश्चिम बंगाल नई दिल्ली, कोलकाता के क्राफ्ट मैनस द्वारा लगाए गए क्राफ्ट मेले का भी उन्होंने भरपूर आनंद लिया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे सुषमा पॉल जी एवं डॉ नेहा की दूरदर्शिता ने एक ही छत के नीचे मिनी इंडिया बसा दिया हो। कॉलेज के विभिन्न विभागों द्वारा आर्ट गैलरी में लगी कला-प्रदर्शनी को देखकर कटारिया जी
मैडम बर्लिया जी एवं डॉ नेहा अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके। कटारिया जी ने विद्यार्थियों की नवोन्मेषशालिनी प्रतिभा, सृजनात्मकता एवं रचनात्मकता से स्तंभित होते हुए कहा कि एक ही मंच पर विभिन्न कलारूपों का संगम एक विशाल सागर में विभिन्न नदियों के समाहित हो जाने जैसा है। उन्होंने कहा निश्चित रूप से आपके विद्यार्थियों में हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने ने एवं संरक्षण करने का सामर्थ्य है। कटारिया ने कहा भारत की इंद्रधनुष रूपी संस्कृति को एक मंच प्रदान करते हुए उसे युवापीढ़ी तक पहुंचाना न केवल सराहनीय है बल्कि औरों के लिए प्रेरणादायक भी है।

गुलाबचंद ने पौधारोपण करते हुए कॉलेज की निरंतर विकास-यात्रा के लिए शुभाशीष भी दी। सुषमा पॉल बर्लिया ने गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में राजेश्वरी सत्या ऑडिटोरियम अपने माता-पिता को समर्पित किया। संस्कृत के पवित्र श्लोकों के उच्चारण के साथ सभागार में पावन ज्योति को प्रज्वलित करते हुए कार्यक्रम का आरंभ किया गया। संगीत-विभाग के विद्यार्थियों द्वारा मंगल गीत की सुरमयी एवं खूबसूरती प्रस्तुति से अतिथि वृंद का संगीतमय अभिनंदन किया गया। एपीजे एजुकेशन की निदेशक डॉ सुचरिता शर्मा ने माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि आप जैसे कर्तव्यनिष्ठ,दूरदर्शी, दृढ़-संकल्पित, नेतृत्व के गुणों से भरपूर, ऊर्जावान,अनुभवी राजनेता का स्वर्णिम-उत्सव के उद्घाटन में आगमन निश्चित रूप से हम सभी को प्रसन्नता प्रदान करने वाला एवं हमारे विद्यार्थियों के सौभाग्य को बढ़ाने वाला है। सुषमा पॉल बर्लिया का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि आप बड़ी तन्मयता एवं समर्पण से डॉ सत्यपाॅल जी की विरासत को तो आगे बढ़ा ही रहीं हैं इसके साथ ही अपनी दूरदर्शिता एवं प्रखर बुद्धि से शिक्षण संस्थाओं का विकास भी कर ही रही है इसके साथ ही उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर प्रगति पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि निशांत बर्लिया, आदित्य बर्लिया एवं डॉ नेहा बर्लिया भी अपने युवा नेतृत्व से एपीजे एजुकेशन को कदम-दर-कदम आगे बढ़ाने में प्रयासरत हैं। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ नेहा बर्लिया का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि वह उच्च स्तरीय शिक्षाविद् होने के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत में भी पारंगत हैं। स्वर्णिम-उत्सव का आधार,प्रेरणा एवं सोच संस्थापक अध्यक्ष डॉ सत्यपाॅल जी के जीवन से प्रेरित लघु फिल्म दिखाई गई। सुषमा पॉल बर्लिया ने माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का स्वर्णिम- उत्सव के ऐतिहसिक क्षणों में स्वागत करते हुए कहा कि जिस सरलता एवं सादगी से आपने क्राफ्टसमैन से बात की है वह आपके व्यक्तित्व के बड़प्पन को दिखाता है। अपने पिता एपीजे एजुकेशन के संस्थापक डॉ सत्यपाॅल जी को याद करते हुए कहा कि वे परंपरागत शिक्षण-संस्थानों के पक्षधर न होकर ऐसे शिक्षण-संस्थानों की शुरुआत करना चाहते थे जोकि विद्यार्थियों की कल्पना को नवाकाश देकर उनमें इंद्रधनुषी रंग भर सके। उन्होंने कहा कि वह भौतिक संसाधनों की दौड़ में न पड़कर जीवन के हर पल का आनंद लेना चाहते थे। मेरी मां राजेश्वरी पाल निरंतर उनकी प्रेरणा रही यही कारण था कि उन्होंने राजेश्वरी कला संगम की स्थापना उन्हीं के नाम को समर्पित की। उन्होंने कहा की डॉ सत्यपाॅल जी ने अपनी दूरदर्शिता एवं प्रखर मेधा से आज से पांच दशक पहले एपीजे जैसे उच्च कोटि संस्थाओं की स्थापना युवापीढ़ी को संवेदनशील एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए तथा ललित कलाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन को शिक्षण संस्थाओं का आधार बनाने के लिए की। मैडम बर्लिया ने कहा कि डॉ सत्यपाॅल की सोच को जीवंत रखने के लिए हम राजेश्वरी कला-महोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कला दिग्गजों को आमंत्रित करते हैं ताकि हमारे नौजवान अपनी परंपरा से जुड़े रहे कॉलेज की क्राफ्ट मेले की खूबसूरती से अचंभित होकर उन्होंने कहा कि आधुनिकता मैं अगर परंपरा का संगम भी कर लिया जाए तो वह और भी ज्यादा दिव्य बन जाता है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर भगवान कृष्ण के जीवन से संबंधित नृत्य-नाटिका कृष्णम की मनमोहक प्रस्तुति ने सबको अध्यात्म की अनुभूति से भर दिया। इस अवसर पर माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, बर्लिया,डॉ नेहा, डॉ सुचरिता एवं डॉ नीरजा ने एपीजे सत्या आर्ट आर्काइव कैटेलॉग का विमोचन किया। माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने संबोधित करते हुए कहा कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मैं उस संस्था में हूं जहां एक व्यक्ति डॉ सत्यपाॅल के समर्पण से इतना बड़ा कला का साम्राज्य स्थापित हो गया। उन्होंने कहा जो अपनी परंपरा अपने पूर्वजो को नहीं भूलते उनकी सफलता निश्चित है। जिस तरह एपीजे एजुकेशन विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहा है वह वापस में सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कला के आधार पर जो आप विद्यार्थियों को भारतीय संस्कारों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हो वह वास्तव में वंदनीय है। कटारिया ने कहा कि जिस तरह नैशनल शिक्षा पॉलिसी को अपनाते हुए आप रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं वह प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जो सोचता है और अगर उसके साथ समर्पण भाव भी आ जाए तो आपकी सफलता को कोई नहीं रोक सकता। कटारिया जी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में इतनी सामर्थ्य है कि वह देश के लिए सशक्त भावी पीढ़ी तैयार कर सकते है। बर्लिया एवं डॉ नेहा ने माननीय राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया जी को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। डॉ नेहा बर्लिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं डॉ सत्यपाॅल जी की सोच को नमन करती हूं,मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि भारत की कला रूपी आत्मा राजेश्वरी कला संगम में ही बसती है। उन्होंने कहा कि राजेश्वरी कला संगम उन लोगों के लिए वरदान है जो कला को जीते हैं और मुझे विश्वास है कि कला मंदिर में जाकर उनके सारे स्वप्न साकार होते हैं उन्होंने कहा की स्वर्ण-जयंती वास्तव में डॉ सत्यपाॅल की दूरदर्शिता एवं राजेश्वरी पॉल जी की प्रेरणा को ही समर्पित है। उन्होंने कहा आज स्वर्णजयंती एवं राजेश्वरी कला महोत्सव में एक साथ एक मंच पर विभिन्न कलाओं से संबंधित कलाकार, गायक, चित्रकार, वादक एवं नर्तक एकत्रित हो रहे हैं जो अपने आप में अतुलनीय है। उन्होंने कहा मैं दिल से माननीय राज्यपाल का आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने इस स्वर्णिम यात्रा को चार चांद लगाने के लिए अपना समय निकाला। इस स्वर्णजयंती के
सफलतापूर्वक आयोजन के लिए मैं डॉ सुचरिता शर्मा, डॉ नीरजा ढींगरा एवं सभी प्राध्यापकवृंद के प्रयासों की सराहना भी करती हूं। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।