जालंधर(अरोड़ा) :- डी.ए.वी. कॉलेज जालंधर में स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विभाग द्वारा हाल ही में “बायोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए हाइड्रोजेल-आधारित नैनोमटेरियल” पर केंद्रित एक बेहद सफल डीबीटी प्रायोजित इंटरएक्टिव सत्र और व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजन की मुख्य वक्ता डॉ. संगीता रॉय (एसोसिएट प्रोफेसर) वैज्ञानिक-ई और इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएनएसटी), मोहाली से थीं। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विभागाध्यक्ष प्रो. शीतल अग्रवाल ने कार्यक्रम की मुख्य अतिथि का परिचय कराया और उनका स्वागत किया। बायोमटेरियल के उभरते क्षेत्र में नवाचार और व्यावहारिक समझ को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डॉ. रॉय की प्रस्तुति में नैनोकेमिस्ट्री के मूलभूत सिद्धांतों, लक्षण वर्णन और उनके विविध अनुप्रयोगों को शामिल किया गया। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया और इस तरह की जानकारीपूर्ण और कौशल-वर्धक कार्यशालाओं के आयोजन में विभाग के प्रयासों को प्रोत्साहित किया।




उन्होंने वैज्ञानिक शिक्षा में व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर बल दिया और विद्यार्थियों तक अत्याधुनिक शोध को पहुंचाने में विभाग की पहल की सराहना की। संवादात्मक सत्र के बाद, प्रतिभागियों ने एक व्यावहारिक कार्यशाला में भाग लिया, जहाँ उन्होंने हाइड्रोजेल-आधारित नैनोमटेरियल के संश्लेषण और विशेषता का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस कार्यशाला में, डॉ. संगीता और उनकी टीम- जिसमें स्वेता मोहंती, रानित भंडारी और चेतना शामिल थीं- उन्होंने रासायनिक कमी प्रक्रिया के माध्यम से सोने के नैनोकणों के संश्लेषण का प्रदर्शन किया, जिसमें उनके विशिष्ट ऑप्टिकल गुणों पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने स्व-संयोजन तकनीकों का उपयोग करके पेप्टाइड-आधारित हाइड्रोजेल के निर्माण के बारे में भी सीखा, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक स्थिर और जैव-संगत संरचनाएँ बनती हैं। व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से, उपस्थित लोगों ने दवा वितरण और ऊतक इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में इन नैनोमटेरियल के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की। डीबीटी विभाग समन्वयक प्रो. तनु महाजन ने डॉ. संगीता रॉय को उनकी व्यावहारिक प्रस्तुति और आकर्षक व्यावहारिक सत्र के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल रूप से सम्पन्न करवाने के लिए समिति के सदस्य डॉ. पूजा, डॉ. शिल्पा, डॉ. अमन, डॉ. सोनिका, डॉ. मनप्रीत और डॉ. ईशा के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन डीएवी कॉलेज जालंधर की छात्रों को अत्याधुनिक शोध तक पहुंच प्रदान करने और वैज्ञानिक जांच की संस्कृति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।